सूरह 17 · जुज़ 15

Al-Isra · 17:7

إِنْ أَحْسَنْتُمْ أَحْسَنْتُمْ لِأَنْفُسِكُمْ ۖ وَإِنْ أَسَأْتُمْ فَلَهَا ۚ فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ الْآخِرَةِ لِيَسُوءُوا وُجُوهَكُمْ وَلِيَدْخُلُوا الْمَسْجِدَ كَمَا دَخَلُوهُ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَلِيُتَبِّرُوا مَا عَلَوْا تَتْبِيرًا

यदि तुम भला करोगे, तो अपने लिए और यदि बुरा करोगे, तो अपने लिए। फिर जब दूसरे उपद्रव का समय आया ताकि (शत्रु) तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दें और मस्जिद (अक़्सा) में वैसे ही प्रवेश कर जायेँ, जैसे प्रथम बार प्रवेश कर गये और ताकि जो भी उनके हाथ आये, उसे पूर्णता नाश[1] कर दे।
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1. जब बनी इस्राईल पुनः पापाचारी बन गये, तो रोम के राजा क़ैसर ने लग भग सन् 70 ई◦ में बैतुल् मक़्दिस पर आक्रमण कर के उन की दुर्गत बना दी। और उन की पुस्तक तौरात का नाश कर दिया और एक बड़ी संख्या को बंदी बना लिया। यह सब उन के कुकर्म के कारण हुआ।

तफ़सीर

ऐ बनी इसराईल! यदि तुमने अच्छे कर्म किए और उन्हें वांछित तरीके से किया, तो उसका प्रतिफल तुम्हें ही मिलने वाला है। क्योंकि अल्लाह तुम्हारे कर्मों से बेनियाज़ है। और यदि तुमने बुरे कर्म किए, तो उसका दुष्परिणाम तुम्हें ही भुगतना पड़ेगा। क्योंकि अल्लाह को, न तो तुम्हारे सुकर्मों से कोई लाभ पहुँचता है और न तुम्हारे कुकर्मों से उसे कोई हानि पहुँचती है। फिर जब दूसरा उपद्रव हुआ, तो हमने तुमपर तुम्हारे शत्रुओं को हावी कर दिया, ताकि वे तुम्हें अपमानित करें और तुम्हें अनेक प्रकार के तिरस्कार व अपमान का स्वाद चखाएँ कि उत्पीड़न तुम्हारे चेहरों पर प्रत्यक्ष हो। और ताकि वे बैतुल मक़्दिस में प्रवेश करें और उसे विनष्ट कर दें, जैसा कि उन्होंने उसमें प्रथम बार प्रवेश किया था और उसे विनष्ट किया था। तथा वे जिन शहरों पर हावी हो सकें, उन्हें पूर्ण रूप से ध्वस्त कर दें।

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