सूरह 17 · जुज़ 15
Al-Isra · 17:45
وَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ حِجَابًا مَسْتُورًا
और जब आप क़ुर्आन पढ़ते हैं, तो हम आपके बीच और उनके बीच, जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं लाते, एक छुपा हुआ आवरण (पर्दा) बना देते[1] हैं।
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1. अर्थात प्रलोक पर ईमान न लाने का यही स्वभाविक परिणाम है कि क़ुर्आन को समझने की योग्यता खो जाती है।
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1. अर्थात प्रलोक पर ईमान न लाने का यही स्वभाविक परिणाम है कि क़ुर्आन को समझने की योग्यता खो जाती है।
तफ़सीर
जब (ऐ रसूल) आप क़ुरआन पढ़ते हैं और वे उसकी डराने-धमकाने वाली बातों और उपदेशों को सुनते हैं, तो हम आपके और क़ियामत के दिन पर ईमान न लाने वालों के बीच एक पर्दा डाल देते हैं, जो उन्हें उनके मुँह फेरने की सज़ा के तौर पर क़ुरआन समझने से रोक देता है।
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