सूरह 14 · जुज़ 13

Ibrahim · 14:6

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ أَنْجَاكُمْ مِنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ وَيُذَبِّحُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُمْ بَلَاءٌ مِنْ رَبِّكُمْ عَظِيمٌ

तथा (याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति से कहाः अपने ऊपर अल्लाह के पुरस्कार को याद करो, जब उसने तुम्हें फ़िरऔनियों से मुक्त किया, जो तुम्हें घोर यातना दे रहे थे, तुम्हारे पुत्रों को वध कर रहे थे और तुम्हारी स्त्रियों को जीवित रहने देते[1] थे और इसमें तुम्हारे परलनहार की ओर से एक महान परीक्षा थी।
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1. ताकि उन के पुरुषों की अधिक संख्या से अपने राज्य के लिये भय न हो। और उन की स्त्रियों का अपमान करें।

तफ़सीर

(ऐ रसूल) उस समय को याद कीजिए, जब मूसा ने अपने पालनहार के आदेश का पालन करते हुए अपनी जाति बनी इसराईल को अल्लाह की ओर से प्राप्त होने वाली नेमतों का स्मरण कराते हुए कहा : ऐ मेरे समुदाय के लोगो! अल्लाह की नेमत को याद करो जब उसने तुम्हें फ़िरऔनियों से बचाया और उनकी यातना से सुरक्षा प्रदान की। वे तुम्हें घोर यातना देते थे। तुम्हारे बेटों का वध कर देते थे ताकि तुम्हारे बीच कोई ऐसा बच्चा न पैदा हो जो फ़िरऔन के राज्य पर क़ब्ज़ा जमा सके। तथा वे तुम्हारी महिलाओं को उन्हें अपमानित और बेइज़्ज़त करने के लिए जीवित रखते थे। उनके इने कृत्यों में तुम्हारे धैर्य की एक महान परीक्षा है। चुनाँचे इस आज़माइश पर धैर्य के बदले में अल्लाह ने तुम्हें फ़िरऔनियों की प्रताड़ना से छुटकारा प्रदान कर दिया।

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