सूरह 14 · जुज़ 13
Ibrahim · 14:4
وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ رَسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ ۖ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَنْ يَشَاءُ وَيَهْدِي مَنْ يَشَاءُ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और हमने किसी (भी) रसूल को उसकी जाति की भाषा ही में भेजा, ताकि वह उनके लिए बात उजागर कर दे। फिर अल्लाह जिसे चाहता है, कुपथ करता है और जिसे चाहता है, सुपथ दर्शा देता है और वही प्रभुत्वशाली और ह़िक्मत वाला है।
तफ़सीर
हमने जो भी रसूल भेजा, उसे उसके समुदाय की भाषा में बात करने वाला बनाकर भेजा। ताकि रसूल अल्लाह के यहाँ से जो कुछ लेकर आए, उनके लिए उसे समझना आसान हो जाए। हमने उसे लोगों को अल्लाह पर ईमान लाने के लिए बाध्य करने के लिए नहीं भेजा। क्योंकि अल्लाह जिसे चाहता है, अपने न्याय के अनुसार गुमराह कर देता है, और जिसे चाहता है, अपनी कृपा से हिदायत का सामर्थ्य प्रदान करता है। वह प्रभुत्वशाली है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, अपनी रचना और प्रबंधन में पूर्ण ह़िकमत वाला है।
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