सूरह 14 · जुज़ 13
Ibrahim · 14:11
قَالَتْ لَهُمْ رُسُلُهُمْ إِنْ نَحْنُ إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُكُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَمُنُّ عَلَىٰ مَنْ يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۖ وَمَا كَانَ لَنَا أَنْ نَأْتِيَكُمْ بِسُلْطَانٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
उनसे उनके रसूलों ने कहाः हम तुम्हारे जैसे मानव पुरुष ही हैं, परन्तु अल्लाह अपने भक्तों में से जिसपर चाहे, उपकार करता है और हमारे बस में नहीं कि अल्लाह की अनुमति के बिना कोई प्रमाण ले आयें और अल्लाह हीपर ईमान वालों को भरोसा करना चाहिए।
तफ़सीर
उनके रसूलों ने उन्हें जवाब देते हुए कहा : हम तो तुम्हारे जैसे इनसान ही हैं। इसलिए हम इसमें आपकी समानता से इनकार नहीं करते हैं। परंतु इस समानता से यह ज़रूरी नहीं है कि हम हर चीज़ में समान हों। क्योंकि अल्लाह अपने बंदों में से जिन पर चाहता है, विशेष कृपा करता है और उन्हें लोगों की ओर संदेशवाहक के रूप में चुन लेता है। तथा अल्लाह की इच्छा के बिना हमारे लिए सही नहीं है कि हम तुम्हारे पास वह प्रमाण लेकर आएँ जिसकी तुमने माँग की है। क्योंकि उसको लाना हमारी क्षमता में नहीं है।बल्कि केवल अल्लाह ही ऐसा करने में सक्षम है। और ईमान वालों को अपने सभी मामलों में अकेले अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
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