सूरह 13 · जुज़ 13

Ar-Ra'd · 13:25

وَالَّذِينَ يَنْقُضُونَ عَهْدَ اللَّهِ مِنْ بَعْدِ مِيثَاقِهِ وَيَقْطَعُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَنْ يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ ۙ أُولَٰئِكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ

और जो लोग अल्लाह से किये वचन को, उसे सुदृढ़ करने के पश्चात्, भंग कर देते हैं और अल्लाह ने जिस संबन्ध को जोड़ने का आदेश दिया[1] है, उसे तोड़ते हैं और धरती में उपद्रव फैलाते हैं। वही हैं, जिनके लिए धिक्कार है और जिनके लिए बुरा आवास है।
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1. ह़दीस में आया है कि जो व्यक्ति यह चाहता हो कि उस की जीविका अधिक, और आयु लम्बी हो तो वह अपने संबन्धों को जोड़े। (सह़ीह़ बुख़ारीः2067, सह़ीह़ मुस्लिमः2557)

तफ़सीर

और जो लोग अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे दृढ़ करने के बाद तोड़ देते हैं, और उन रिश्तों-नातों को काटते हैं, जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है, तथा अल्लाह तआला की अवज्ञा करके धरती में उत्पात मचाते हैं। यही अभागे (दुर्भाग्यशाली) लोग हैं, जिनके लिए अल्लाह की दया से निष्कासन है और उनके लिए बुरा परिणाम है, जो कि नरक है।

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