सूरह 13 · जुज़ 13

Ar-Ra'd · 13:15

وَلِلَّهِ يَسْجُدُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ طَوْعًا وَكَرْهًا وَظِلَالُهُمْ بِالْغُدُوِّ وَالْآصَالِ ۩

और अल्लाह ही को सज्दा करता है, चाह या न चाह, वह जो आकाशों तथा धरती में है और उनकी प्रछाईयाँ[1] भी प्रातः और संध्या[2]।
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1. अर्थात सब उस के स्वभाविक नियम के अधीन हैं। 2. यहाँ सज्दा करना चाहिये।

तफ़सीर

आकाशों और धरती में जो भी हैं, सब अकेले अल्लाह ही को सजदा करते हैं। इसमें मोमिन और काफ़िर बराबर हैं। सिवाय इसके कि मोमिन उसके सामने स्वेच्छा से झुकता और सजदा करता है। जबकि काफ़िर न चाहते हुए भी उसके सामने झुकने पर मजबूर होता है। तथा उसकी प्रकृति उसे उसके सामने स्वेच्छा से झुकने के लिए निर्देश देती है। और प्राणियों में से जिसकी भी परछाई है, उसकी परछाई दिन की शुरुआत और उसके अंत में उसी के अधीन होती है।

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