सूरह 13 · जुज़ 13

Ar-Ra'd · 13:11

لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِنْ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنْفُسِهِمْ ۗ وَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ سُوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَمَا لَهُمْ مِنْ دُونِهِ مِنْ وَالٍ

उस (अल्लाह) के रखवाले (फरिश्ते) हैं। उसके आगे तथा पीछे, जो अल्लाह के आदेश से, उसकी रक्षा कर रहे हैं। वास्तव में, अल्लाह किसी जाति की दशा नहीं बदलता, जब तक वह स्वयं अपनी दशा न बदल ले तथा जब अल्लाह किसी जाति के साथ बुराई का निश्चय कर ले, तो उसे फेरा नहीं जा सकता और न उनका उस (अल्लाह) के सिवा कोई सहायक है।

तफ़सीर

सर्वशक्तिमान अल्लाह के कुछ फ़रिश्ते ऐसे हैं, जो इनसान के पास बारी-बारी आते हैं। उनमें से कुछ रात में आते हैं, और कुछ दिन के दौरान। वे अल्लाह के आदेश से इनसान की उन समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं, जिनसे इनसान के बचाव का अल्लाह ने फ़ैसला कर रखा होता है। तथा वे इनसान की बातों और कार्यों को लिखते हैं। निःसंदेह अल्लाह किसी समुदाय की दशा को एक अच्छी स्थिति से उसके विपरीत एक अप्रिय स्थिति में नहीं बदलता, जब तक कि वे अपने स्वयं के धन्यवाद (शुक्र) की स्थिति को न बदल लें। और जब अल्लाह किसी क़ौम को विनष्ट करना चाहता है, तो उसके इरादे को कोई टाल नहीं सकता। और (ऐ लोगो!) तुम्हारा अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं है, जो तुम्हारे मामलों का संरक्षण कर सके, कि तुम अपनी विपत्ति को दूर करने के लिए उसका सहारा ले सको।

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