सूरह 12 · जुज़ 13

Yusuf · 12:81

ارْجِعُوا إِلَىٰ أَبِيكُمْ فَقُولُوا يَا أَبَانَا إِنَّ ابْنَكَ سَرَقَ وَمَا شَهِدْنَا إِلَّا بِمَا عَلِمْنَا وَمَا كُنَّا لِلْغَيْبِ حَافِظِينَ

तुम अपने पिता की ओर लौट जाओ और कहो कि हमारे पिता! आपके पुत्र ने चोरी की है और हमने वही साक्ष्य दिया, जिसे हमने[1] जाना और हम ग़ैब के रखवाले नहीं[2] थे।
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1. अर्थात राजा का प्याला उस के सामान से निकलते देखा। 2. अर्थात आप को उस के वापिस लाने का वचन देते समय यह नहीं जानते थे कि वह चोरी करेगा। (तफ़्सीरे क़ुर्तुबी)

तफ़सीर

और बड़े भाई ने कहा : अपने पिता के पास वापस जाओ और उनसे कहो : आपके बेटे ने चोरी की है। इसलिए अज़ीज़ -ए- मिस्र ने चोरी की सज़ा के तौर पर उसे दास बना लिया है। हम तो वही कह रहे हैं, जो हमने जाना है। क्योंकि हमने देखा है कि पैमाना उसी की बोरी से निकाला गया था। हमें क्या पता था कि वह चोरी करेगा। यदि पता होता, तो हम आपको उसे वापस लाने का वचन नहीं देते।

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