सूरह 12 · जुज़ 13

Yusuf · 12:65

وَلَمَّا فَتَحُوا مَتَاعَهُمْ وَجَدُوا بِضَاعَتَهُمْ رُدَّتْ إِلَيْهِمْ ۖ قَالُوا يَا أَبَانَا مَا نَبْغِي ۖ هَٰذِهِ بِضَاعَتُنَا رُدَّتْ إِلَيْنَا ۖ وَنَمِيرُ أَهْلَنَا وَنَحْفَظُ أَخَانَا وَنَزْدَادُ كَيْلَ بَعِيرٍ ۖ ذَٰلِكَ كَيْلٌ يَسِيرٌ

और जब उन्होंने अपना सामान खोला, तो पाया कि उनका मूलधन उन्हें फेर दिया गया है, उन्होंने कहाः हे हमारे पिता! हमें और क्या चाहिए? ये हमारा धन, हमें फेर दिया गया है? हम अपने घराने के लिए ग़ल्ले (अन्न) लायेंगे और एक ऊँट का बोझ अधिक लायेंगे[1], ये माप (अन्न) बहुत थोड़ा है।
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1. अर्थात अपने भाई बिनयामीन का जो उन की दूसरी माँ से था।

तफ़सीर

जब उन्होंने अपने लाए हुए अनाज की बोरियाँ खोलीं, तो देखा कि उसका दाम वापस कर दिया गया है। यह देखकर उन्होंने अपने पिता से कहा : इस सम्मान के बाद हमें इस अज़ीज़ से और क्या चाहिए? यह हमारे अनाज का दाम है, जिसे अज़ीज़ ने अपने अनुग्रह से हमें वापस कर दिया है। हम अपने घर वालों के लिए अनाज ले आएँगे और अपने भाई की उससे रक्षा करेंगे जिसका आपको भय है, और उसे साथ ले जाने के कारण एक ऊँट के बोझभर ग़ल्ला अधिक लाएँगे। क्योंकि अज़ीज़ के लिए एक ऊँट की माप बढ़ाना बहुत आसान है।

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