सूरह 12 · जुज़ 13
Yusuf · 12:62
وَقَالَ لِفِتْيَانِهِ اجْعَلُوا بِضَاعَتَهُمْ فِي رِحَالِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَعْرِفُونَهَا إِذَا انْقَلَبُوا إِلَىٰ أَهْلِهِمْ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और यूसुफ़ ने अपने सेवकों को आदेश दियाः उनका मूलधन[1] उनकी बोरियों में रख दो, संभवतः वे उसे पहचान लें, जब अपने परिजनों में जायें और संभवतः वापस आयें।
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1. अर्थात जिस धन से अन्न ख़रीदा है।
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1. अर्थात जिस धन से अन्न ख़रीदा है।
तफ़सीर
और यूसुफ़ ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा : इन लोगों का धन इन्हें लौटा दो, ताकि वे अपनी वापसी पर जान सकें कि हमने उनसे यह नहीं खरीदा है। और यह उन्हें अपने भाई के साथ फिर से लौटने के लिए मजबूर करेगा, ताकि वे यूसुफ़ के सामने अपनी सच्चाई साबित करें और यूसुफ़ उनसे उनका धन स्वीकार कर लें।
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