सूरह 12 · जुज़ 12
Yusuf · 12:51
قَالَ مَا خَطْبُكُنَّ إِذْ رَاوَدْتُنَّ يُوسُفَ عَنْ نَفْسِهِ ۚ قُلْنَ حَاشَ لِلَّهِ مَا عَلِمْنَا عَلَيْهِ مِنْ سُوءٍ ۚ قَالَتِ امْرَأَتُ الْعَزِيزِ الْآنَ حَصْحَصَ الْحَقُّ أَنَا رَاوَدْتُهُ عَنْ نَفْسِهِ وَإِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ
(राजा) ने उन स्त्रियों से पूछाः तुम्हारा क्या अनुभव है, उस समय का, जब तुमने यूसुफ़ के मन को रिझाया था? सबने कहाः अल्लाह पवित्र है! उसपर हमने कोई बुराई का प्रभाव नहीं जाना। तब अज़ीज़ की पत्नी बोल उठीः अब सत्य उजागर हो गया, वास्तव में, मैंने ही उसके मन को रिझाया था और निःसंदेह वह सत्यवादियों में है[1]।
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1. यह क़ुर्आन पाक का बड़ा उपकार है कि उस ने रसूलों तथा नबियों पर लगाये गये बहुत से आरोपों का निवारण (खण्डन) कर दिया है। जिसे अह्ले किताब (यहूदी तथा ईसाई) ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के विषय में बहुत सी निर्मूल बातें घड़ ली थीं जिन को क़ुर्आन ने आ कर साफ़ कर दिया।
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1. यह क़ुर्आन पाक का बड़ा उपकार है कि उस ने रसूलों तथा नबियों पर लगाये गये बहुत से आरोपों का निवारण (खण्डन) कर दिया है। जिसे अह्ले किताब (यहूदी तथा ईसाई) ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के विषय में बहुत सी निर्मूल बातें घड़ ली थीं जिन को क़ुर्आन ने आ कर साफ़ कर दिया।
तफ़सीर
राजा ने स्त्रियों को संबोधित करते हुए कहा : उस समय तुम्हारा क्या मामला था, जब तुमने छल के द्वारा यूसुफ़ को अपने साथ कुकर्म करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की थी? स्त्रियों ने राजा के जवाब में कहा : अल्लाह न करे कि यूसुफ़ पर आरोप लगाया जाए, अल्लाह की क़सम! हमने उसमें कोई बुराई नहीं देखी। इसपर अज़ीज़ की पत्नी ने जो कुछ किया था, उसको स्वीकारते हुए कहा : अब सच्चाई सामने आ गई है, मैंने ही उसे बहकाने की कोशिश की थी, उसने मुझे फुसलाने की कोशिश नहीं की। निःसंदेह उसने मेरे लगाए हुए आरोप से निर्दोष होने का जो दावा किया है, उसमें वह बिल्कुल सच्चा है।
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