सूरह 12 · जुज़ 12
Yusuf · 12:46
يُوسُفُ أَيُّهَا الصِّدِّيقُ أَفْتِنَا فِي سَبْعِ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعِ سُنْبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ لَعَلِّي أَرْجِعُ إِلَى النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَعْلَمُونَ
हे यूसुफ़! हे सत्यवादी! हमें सात मोटी गायों के बारे में बताओ, जिन्हें सात दुबली गायें खा रही हैं और सात हरी बालियाँ हैं और सात सूखी, ताकि लोगों के पास वापस जाऊँ और ताकि वे जान[1] लें।
____________________
1. अर्थात आप की प्रतिष्ठा और ज्ञान को।
____________________
1. अर्थात आप की प्रतिष्ठा और ज्ञान को।
तफ़सीर
चुनाँचे जब रिहाई पाने वाला व्यक्ति यूसुफ़ के पास पहुँचा, तो उनसे कहा : ऐ यूसुफ़! ऐ सच्चे इनसान! हमें ऐसे व्यक्ति के सपने का अर्थ बताइँ, जिसने देखा कि सात मोटी गायों को सात दुबली गाएँ खा रही हैं, तथा उसने सात हरी बालियों और सात सूखी बालियों को देखा है। ताकि मैं राजा और उसके साथियों के पास वापस जाऊँ और वे राजा के सपने का अर्थ जान सकें। तथा वे आपकी प्रतिष्ठा और आपकी स्थिति जान सकें।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें