सूरह 12 · जुज़ 12
Yusuf · 12:35
ثُمَّ بَدَا لَهُمْ مِنْ بَعْدِ مَا رَأَوُا الْآيَاتِ لَيَسْجُنُنَّهُ حَتَّىٰ حِينٍ
फिर उन लोगों[1] ने उचित समझा, इसके पश्चात् कि निशानियाँ देख[2] लीं कि उस (यूसुफ़) को एक अवधि तक के लिए बंदी बना दें।
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1. अर्थात अज़ीज़ (मिस्र देश का शासक) और उस के साथियों ने। 2. अर्थात् यूसुफ़ के निर्दोष होने की निशानियाँ।
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1. अर्थात अज़ीज़ (मिस्र देश का शासक) और उस के साथियों ने। 2. अर्थात् यूसुफ़ के निर्दोष होने की निशानियाँ।
तफ़सीर
फिर जब अज़ीज़ और उसके समुदाय के लोगों ने उनकी बेगुनाही का सबूत देखा, तो उनकी यह राय बनी कि उन्हें एक अज्ञात अवधि के लिए जेल में डाल दें। (ताकि वह मामला खुल न जाए)।
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