सूरह 12 · जुज़ 12
Yusuf · 12:31
فَلَمَّا سَمِعَتْ بِمَكْرِهِنَّ أَرْسَلَتْ إِلَيْهِنَّ وَأَعْتَدَتْ لَهُنَّ مُتَّكَأً وَآتَتْ كُلَّ وَاحِدَةٍ مِنْهُنَّ سِكِّينًا وَقَالَتِ اخْرُجْ عَلَيْهِنَّ ۖ فَلَمَّا رَأَيْنَهُ أَكْبَرْنَهُ وَقَطَّعْنَ أَيْدِيَهُنَّ وَقُلْنَ حَاشَ لِلَّهِ مَا هَٰذَا بَشَرًا إِنْ هَٰذَا إِلَّا مَلَكٌ كَرِيمٌ
फिर जब उसने उन स्त्रियों की मक्कारी की बात सुनी, तो उन्हें बुला भेजा और उनके (आतिथ्य) के लिए गाव-तकिये लगवाये और प्रत्येक स्त्री को एक छुरी दे दी[1]। उसने (यूसुफ़ से) कहाः इनके समक्ष "निकल आ"। फिर जब उन स्त्रियों ने उसे देखा, तो चकित (दंग) होकर अपने हाथ काट बैठीं तथा पुकार उठीं: अल्लाह पवित्र है! ये मनुष्य नहीं ये तो कोई सम्मानित फ़रिश्ता है।
____________________
1. ताकि अतिथि स्त्रियाँ उस से फलों को काट कर खायें जो उन के लिये रखे गये थे।
____________________
1. ताकि अतिथि स्त्रियाँ उस से फलों को काट कर खायें जो उन के लिये रखे गये थे।
तफ़सीर
जब अज़ीज़ की पत्नी को उन स्त्रियों की उसकी निंदा करने और उसकी अनुपस्थिति में उसकी बुराई करने की बात पहुँची, तो उसने उन स्त्रियों को बुलवा भेजा, ताकि वे यूसुफ़ को देखें, फिर वे उसे मा'ज़ूर (क्षम्य) समझें। उसने उनके लिए बैठने की जगह तैयार की, जहाँ बिस्तर और गाव-तकिए लगवा दिए। फिर उसने आमंत्रित औरतों में से हर एक को खाना काटने के लिए एक-एक चाक़ू दिया और यूसुफ़ अलैहिस्सलाम से कहा : इनके सामने आ जाओ। चुनाँचे जब उन स्त्रियों ने उनकी ओर देखा, तो उन्हें बहुत बड़ा समझा और उनकी सुंदरता पर चकित रह गईं और उनकी ख़ूबसूरती को देखकर उनके होश उड़ गए और - उनके साथ आकर्षण की तीव्रता से - उन्होंने खाना काटने के लिए तैयार चाक़ू से अपने हाथों को घायल कर दिया और बोल उठीं : अल्लाह पवित्र है, यह लड़का मनुष्य नहीं है, क्योंकि इसमें जो सुंदरता है वह किसी इनसान में देखी नहीं गई। वह और कुछ नहीं बल्कि सम्माननीय फ़रिश्तों में से एक सम्मानित फ़रिश्ता है।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें