सूरह 12 · जुज़ 12
Yusuf · 12:15
فَلَمَّا ذَهَبُوا بِهِ وَأَجْمَعُوا أَنْ يَجْعَلُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِ لَتُنَبِّئَنَّهُمْ بِأَمْرِهِمْ هَٰذَا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
फिर जब वे उसे ले गये और निश्चय किया कि उसे अंधे कुएं में डाल दें और हमने उस (यूसुफ़) की ओर वह़्यी की कि तुम अवश्य इन्हें इनका कर्म बताओगे और वे कुछ जानते न होंगे।
तफ़सीर
फिर याक़ूब ने उसे उनके साथ भेज दिया। जब वे उसे लेकर दूर चले गए और उसे कुएँ के तल में फेंकने का निश्चय कर लिया, तो उस वक़्त हमने यूसुफ़ की ओर वह़्य की : तुम अवश्य उन्हें उनके इस करतूत के बारे में बताओगे और उस समय वे तुम्हें पहचान भी नहीं पाएँगे।
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