सूरह 12 · जुज़ 13
Yusuf · 12:106
وَمَا يُؤْمِنُ أَكْثَرُهُمْ بِاللَّهِ إِلَّا وَهُمْ مُشْرِكُونَ
और उनमें से अधिक्तर अल्लाह को मानते तो हैं, परन्तु (साथ ही) मुश्रिक (मिश्रणवादी)[1] भी हैं।
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1. अर्थात अल्लाह के अस्तित्व और गुणों का विश्वास रखते हैं, फिर भी पूजा-अर्चना अन्य की करते हैं।
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1. अर्थात अल्लाह के अस्तित्व और गुणों का विश्वास रखते हैं, फिर भी पूजा-अर्चना अन्य की करते हैं।
तफ़सीर
अधिकांश लोग अल्लाह पर यह ईमान नहीं रखते कि वह पैदा करने वाला, रोज़ी देने वाला, जीवन एवं मृत्यु देने वाला है, परंतु इस हाल में कि वे उसके साथ अन्य मूर्तियों और बुतों की पूजा करते हैं और यह दावा करते हैं कि अल्लाह का कोई बेटा है, अल्लाह इससे बहुत पवित्र है।
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