सूरह 111 · जुज़ 30
Al-Masad · 111:1
تَبَّتْ يَدَا أَبِي لَهَبٍ وَتَبَّ
अबू लहब के दोनों हाथ नाश हो गये और वह स्वयं भी नाश हो गया![1]
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1. अबू लहब का अर्थ ज्वाला मुखी है। वह अति सुन्दर और गोरा था। उस का नाम वास्तव में 'अब्दुल उज़्ज़ा' था, अर्थात उज़्ज़ा का भक्त और दास। 'उज़्ज़ा' उन की एक देवी का नाम था। परन्तु वह अबू लहब के नाम से जाना जाता था। इस लिये क़ुर्आन ने उस का यही नाम प्रयोग किया है और इस में उस के नरक की ज्वाला में पड़ने का संकेत भी है।
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1. अबू लहब का अर्थ ज्वाला मुखी है। वह अति सुन्दर और गोरा था। उस का नाम वास्तव में 'अब्दुल उज़्ज़ा' था, अर्थात उज़्ज़ा का भक्त और दास। 'उज़्ज़ा' उन की एक देवी का नाम था। परन्तु वह अबू लहब के नाम से जाना जाता था। इस लिये क़ुर्आन ने उस का यही नाम प्रयोग किया है और इस में उस के नरक की ज्वाला में पड़ने का संकेत भी है।
तफ़सीर
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के चाचा अबू लहब बिन अब्दुल मुत्तलिब के सारे अमल बर्बाद होने के कारण, उसके दोनों हाथ क्षतिग्रस्त हो जाएँ; क्योंकि वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कष्ट पहुँचाया करता था, तथा उसकी सारी कोशिश विफल हो गई।
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