सूरह 11 · जुज़ 12
Hud · 11:88
قَالَ يَا قَوْمِ أَرَأَيْتُمْ إِنْ كُنْتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِنْ رَبِّي وَرَزَقَنِي مِنْهُ رِزْقًا حَسَنًا ۚ وَمَا أُرِيدُ أَنْ أُخَالِفَكُمْ إِلَىٰ مَا أَنْهَاكُمْ عَنْهُ ۚ إِنْ أُرِيدُ إِلَّا الْإِصْلَاحَ مَا اسْتَطَعْتُ ۚ وَمَا تَوْفِيقِي إِلَّا بِاللَّهِ ۚ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ أُنِيبُ
शोऐब ने कहाः हे मेरी जाति के लोगो! तुम बताओ, यदि मैं अपने पालनहार की ओर से प्रत्यक्ष प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अच्छी जीविका प्रदान की हो, (तो कैसे तुम्हारा साथ दूँ?) मैं नहीं चाहता कि उसके विरुध्द करूँ, जिससे तुम्हें रोक रहा हूँ। मैं जहाँ तक हो सके, सुधार ही चाहता हूँ और ये जो कुछ करना चाहता हूँ, अल्लाह के योगदान पर निर्भर करता है। मैंने उसीपर भरोसा किया है और उसी की ओर ध्यानमग्न रहता हूँ।
तफ़सीर
शुऐब ने अपनी जाति के लोगों से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम मुझे ज़रा यह बताओ, यदि मैं अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण तथा दूरदर्शिता पर हूँ और उसने अपनी ओर से मुझे हलाल रोज़ी भी दे रखी है और नुबुव्वत प्रदान की है, तो तुम्हारा हाल क्या होगा। मेरा उद्देश्य यह नहीं है कि मैं तुम्हें किसी चीज़ से रोकूँ और तुम्हारी मुखालफत करते हुए स्वयं वही काम करूँ। मेरा उद्देश्य केवल यह है कि तुम्हें अपने पालनहार की तौहीद की ओर बुलाकर और शक्ति भर उसका आज्ञापालन करके तुम्हारा सुधार करूँ। और मुझे इसका सामर्थ्य प्रदान करने वाला केवल अल्लाह महिमावान है। मैं अपने सभी कामों में अकेले उसी पर भरोसा करता हूँ और उसी की ओर लौटता हूँ।
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