सूरह 11 · जुज़ 12

Hud · 11:81

قَالُوا يَا لُوطُ إِنَّا رُسُلُ رَبِّكَ لَنْ يَصِلُوا إِلَيْكَ ۖ فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ إِلَّا امْرَأَتَكَ ۖ إِنَّهُ مُصِيبُهَا مَا أَصَابَهُمْ ۚ إِنَّ مَوْعِدَهُمُ الصُّبْحُ ۚ أَلَيْسَ الصُّبْحُ بِقَرِيبٍ

फ़रिश्तों ने कहाः हे लूत! हम तेरे पालनहार के भेजे हुए (फ़रिश्ते) हैं। वे कदापि तुझतक नहीं पहुँच सकेंगे। जब कुछ रात रह जाये, तो अपने परिवार के साथ निकल जा और तुममें से कोई फिरकर न देखे। परन्तु तेरी पत्नी (साथ नहीं जायेगी)। उसपर भी वही बीतने वाला है, जो उनपर बीतेगा। उनकी यातना का निर्धारित समय प्रातः काल है। क्या प्रातः काल समीप नहीं है?

तफ़सीर

फ़रिश्तों ने लूत अलैहिस्सलाम से कहा : ऐ लूत! हम स्वर्गदूत हैं। हमें अल्लाह ने भेजा है। तेरी जाति के लोग कदापि बुराई के साथ तेरे पास नहीं पहुँच सकते। अतः तू अपने परिवार के साथ इस गाँव से रात के अंधेरे में निकल जा। और तुम में से कोई भी व्यक्ति पीछे मुड़कर न देखे। परन्तु तेरी पत्नी उल्लंघन करते हुए पीछे मुड़कर देखेगी। क्योंकि उसे भी वही यातना पहुँचने वाली है, जो तेरी जाति के लोगों को पहुँचेगी। उन्हें विनष्ट करने का समय प्रातः काल है और यह समय निकट ही है।

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