सूरह 11 · जुज़ 12
Hud · 11:62
قَالُوا يَا صَالِحُ قَدْ كُنْتَ فِينَا مَرْجُوًّا قَبْلَ هَٰذَا ۖ أَتَنْهَانَا أَنْ نَعْبُدَ مَا يَعْبُدُ آبَاؤُنَا وَإِنَّنَا لَفِي شَكٍّ مِمَّا تَدْعُونَا إِلَيْهِ مُرِيبٍ
उन्होंने कहाः हे सालेह! हमारे बीच इससे पहले तुझसे बड़ी आशा थी, क्या तू हमें इस बात से रोक रहा है कि हम उसकी पूजा करें, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा करते रहे? तू जिस चीज़ (एकेश्वरवाद) की ओर बुला रहा है, वास्तव में, उसके बारे में हमें संदेह है, जिसमें हमें द्विधा है।
तफ़सीर
उनसे उनकी जाति के लोगों ने कहा : ऐ सालेह! तू अपने इस निमंत्रण से पहले हमारे बीच एक उच्च स्थिति वाला था। हम उम्मीद कर रहे थे कि तू सलाह व मशवरे वाला एक समझदार व्यक्ति होगा। ऐ सालेह! क्या तू हमें उसकी उपासना से रोक रहा है, जिसकी उपासना हमारे बाप दादा करते आए हैं? और तू जो हमें केवल एक अल्लाह की इबादत की ओर बुला रहा है, हमें उसमें संदेह है। यही कारण है कि हम तुझपर अल्लाह के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाते हैं।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें