सूरह 11 · जुज़ 12
Hud · 11:56
إِنِّي تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ رَبِّي وَرَبِّكُمْ ۚ مَا مِنْ دَابَّةٍ إِلَّا هُوَ آخِذٌ بِنَاصِيَتِهَا ۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ
वास्तव में, मैंने अल्लाह पर, जो मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है, भरोसा किया है। कोई चलने वाला जीव ऐसा नहीं, जो उसके अधिकार में न हो, वास्तव में, मेरा पालनहार सीधी राह[1] पर है।
____________________
1. अर्थात उस की राह अत्याचार की राह नहीं हो सकती कि तुम दुराचारी और कुपथ में रह कर सफल रहो और मैं सदाचारी रह कर हानि में पड़ूँ।
____________________
1. अर्थात उस की राह अत्याचार की राह नहीं हो सकती कि तुम दुराचारी और कुपथ में रह कर सफल रहो और मैं सदाचारी रह कर हानि में पड़ूँ।
तफ़सीर
मैंने अकेले अल्लाह पर भरोसा किया तथा अपने मामले में उसी का सहारा लिया है। क्योंकि वही मेरा और तुम्हारा पालनहार है। धरती पर जो भी जीव चलता है, वह अल्लाह के अधीन उसकी संप्रभुता और अधिकार के मातहत है। वह उसे जैसे चाहता है, फेरता है। निःसंदेह मेरा पालनहार सत्य और न्याय पर है। इसलिए वह कदापि तुम्हें मेरे ऊपर सशक्त नहीं करेगा। क्योंकि मैं सत्य पर हूँ और तुम झूठ पर हो।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें