सूरह 11 · जुज़ 12

Hud · 11:51

يَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى الَّذِي فَطَرَنِي ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ

हे मेरी जाति के लोगो! मैं तुमसे इसपर कोई बदला नहीं चाहता; मेरा पारिश्रमिक (बदला) उसी (अल्लाह) पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम (इतनी) बात भी नहीं समझते[1]?
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1. अर्थात यदि तुम समझ रखते तो अवश्य सोचते कि एक व्यक्ति अपने किसी संसारिक स्वार्थ के बिना क्यों हमें रातो दिन उपदेश दे रहा है और सारे दुःख झेल रहा है? उस के पास कोई ऐसी बात अवश्य होगी जिस के लिये अपनी जान जोखिम में डाल रहा है।

तफ़सीर

ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं अपने पालनहार की ओर से तुम्हें उपदेश देने और उसकी ओर तुम्हें आमंत्रित करने का कोई मुआवज़ा नहीं माँगता। मेरा बदला केवल उस अल्लाह पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम यह नहीं समझते और मेरे आह्वान को स्वीकार नहीं करते?

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