सूरह 11 · जुज़ 12
Hud · 11:30
وَيَا قَوْمِ مَنْ يَنْصُرُنِي مِنَ اللَّهِ إِنْ طَرَدْتُهُمْ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
और हे मेरी जाति के लोगो! कौन अल्लाह की पकड़ से[1] मुझे बचायेगा, यदि मैं उन्हें अपने पास से धुतकार दूँ? क्या तुम सोचते नहीं हो?
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1. अर्थात अल्लाह की पकड़ से, जिस के पास ईमान और कर्म की प्रधानता है, धन-धान्य की नहीं।
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1. अर्थात अल्लाह की पकड़ से, जिस के पास ईमान और कर्म की प्रधानता है, धन-धान्य की नहीं।
तफ़सीर
ऐ मेरी जाति के लोगो! यदि मैं इन मोमिनों को किसी दोष के बिना नाहक़ निष्कासित कर दूँ, तो मुझसे अल्लाह की सज़ा को कौन हटाएगा? क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते और वह कार्य करने का प्रयास नहीं करते, जो तुम्हारे लिए सबसे अच्छा और सबसे लाभदायक हो?
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