सूरह 11 · जुज़ 12
Hud · 11:101
وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِنْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ ۖ فَمَا أَغْنَتْ عَنْهُمْ آلِهَتُهُمُ الَّتِي يَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ مِنْ شَيْءٍ لَمَّا جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَمَا زَادُوهُمْ غَيْرَ تَتْبِيبٍ
और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परन्तु उन्होंने स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया। तो उनके वे पूज्य, जिन्हें व अल्लाह के सिवा पुकार रहे थे, उनके कुछ काम नहीं आये, जब आपके पालनहार का आदेश आ गया और उन्होंने उन्हें हानि पहुँचाने के सिवा और कुछ नहीं किया[1]।
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1. अर्थात यह जातियाँ अपने देवी-देवता की पूजा इस लिये करती थीं कि वह उन्हें लाभ पहुँचायेंगे। किन्तु उन की पूजा ही उन पर अधिक यातना का कारण बन गई।
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1. अर्थात यह जातियाँ अपने देवी-देवता की पूजा इस लिये करती थीं कि वह उन्हें लाभ पहुँचायेंगे। किन्तु उन की पूजा ही उन पर अधिक यातना का कारण बन गई।
तफ़सीर
और हमने उन्हें विनष्ट करके उनपर कोई अत्याचार नहीं किया, बल्कि उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र करके अपने आपको विनाश का हक़दार बनाकर स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया। ऐ रसूल! जब उन्हें विनष्ट करने का आपके पालनहार का आदेश आ गया, तो वे जिन पूज्यों की पूजा किया करते थे, वे उनसे उनपर आने वाले अज़ाब को न टाल सके तथा नुक़सान एवं विनाश में वृद्धि के सिवा उनके किसी काम न आए।
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