सूरह 10 · जुज़ 11
Yunus · 10:98
فَلَوْلَا كَانَتْ قَرْيَةٌ آمَنَتْ فَنَفَعَهَا إِيمَانُهَا إِلَّا قَوْمَ يُونُسَ لَمَّا آمَنُوا كَشَفْنَا عَنْهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ
फिर, ऐसा क्यों नहीं हुआ कि कोई बस्ती ईमान[1] लाये, फिर उसका ईमान उसे लाभ पहुँचाये, यूनुस की जाति के सिवा, जब वे ईमान लाये, तो हमने उनके सांसारिक जीवन में अपमानकारी यातना दूर कर[2] दी और उन्हें, एक निश्चित अवधि तक लाभान्वित होने का अवसर दे दिया।
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1. अर्थात यातना का लक्षण देखने के पश्चात्। 2. यूनुस अलैहिस्सलाम का युग ईसा मसीह़ से आठ सौ वर्ष पहले बताया जाता है। भाष्यकारों ने लिखा है कि वह यातना की सूचना दे कर अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर नीनवा से निकल गये। इस लिये जब यातना के लक्षण नागरिकों ने देखे और अल्लाह से क्षमा याचना करने लगे तो उन से यातना दूर कर दी गयी। (इब्ने कसीर)
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1. अर्थात यातना का लक्षण देखने के पश्चात्। 2. यूनुस अलैहिस्सलाम का युग ईसा मसीह़ से आठ सौ वर्ष पहले बताया जाता है। भाष्यकारों ने लिखा है कि वह यातना की सूचना दे कर अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर नीनवा से निकल गये। इस लिये जब यातना के लक्षण नागरिकों ने देखे और अल्लाह से क्षमा याचना करने लगे तो उन से यातना दूर कर दी गयी। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
ऐसा नहीं हुआ है कि जिन बस्तियों की ओर हमने अपने रसूलों को भेजा था, उनमें से कोई बस्ती यातना देखने से पहले सार्थक रूप से ईमान लाई हो, फिर यातना देखने से पहले ईमान लाने के कारण उसका ईमान उसे लाभ पहुँचाया हो, सिवाय यूनुस अलैहिस्सलाम की क़ौम के, कि जब वे सच्चा ईमान ले आए, तो हमने सांसारिक जीवन में उनके ऊपर से अपमान व तिरस्कार के अज़ाब को हटा दिया और उन्हें उनकी समय सीमा समाप्त होने तक (दुनिया की सामग्रियों से) लाभान्वित होने का अवसर प्रदान किया।
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