सूरह 10 · जुज़ 11

Yunus · 10:83

فَمَا آمَنَ لِمُوسَىٰ إِلَّا ذُرِّيَّةٌ مِنْ قَوْمِهِ عَلَىٰ خَوْفٍ مِنْ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِمْ أَنْ يَفْتِنَهُمْ ۚ وَإِنَّ فِرْعَوْنَ لَعَالٍ فِي الْأَرْضِ وَإِنَّهُ لَمِنَ الْمُسْرِفِينَ

तो मूसा पर, उसकी जाति के कुछ नवयुवकों के सिवा, कोई ईमान नहीं लाया, फ़िरऔन और अपने प्रमुखों के भय से कि उन्हें किसी यातना में न डाल दें। वास्तव में, फ़िर्औन का धरती में बड़ा प्रभुत्व था और वह वस्तुतः उल्लंघनकारियों में था।

तफ़सीर

मूसा अलैहिस्सलाम की क़ौम ने मुँह फेरने की ठान रखी थी। चुनाँचे मूसा अलैहिस्सलाम पर (उनके प्रत्यक्ष निशानियों और स्पष्ट प्रमाणों को लाने के बाद भी) उनकी क़ौम बनू इसराईल के केवल कुछ युवाओं ने विश्वास किया, जबकि वे फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों से डरे हुए थे कि उनका मामला अगर प्रकाश में आ गया, तो वे उन्हें यातना में डालकर उन्हें उनके ईमान से विचलित न कर दें। दरअसल, फिरऔन अभिमानी तथा मिस्र और उसके लोगों पर हावी व मुसल्लत था। तथा निःसंदेह वह कुफ़्र, बनू इसराईल की हत्या करने और उन्हें यातना देने में हद से आगे बढ़ा हुआ था।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें