सूरह 10 · जुज़ 11

Yunus · 10:44

إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ النَّاسَ شَيْئًا وَلَٰكِنَّ النَّاسَ أَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ

वास्तव में, अल्लाह, लोगों पर अत्याचार नहीं करता, परन्तु लोग स्वयं अपने ऊपर अत्याचार करते हैं[1]।
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1. भावार्थ यह है कि लोग अल्लाह की दी हुयी समझ बूझ से काम न ले कर सत्य और वास्तविक्ता के ज्ञान की अर्हता खो देते हैं।

तफ़सीर

निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों पर अत्याचार करने से पाक है। वह उनपर कणभर भी अत्याचार नहीं करता, परंतु वे स्वयं ही असत्य के पक्षपात, अहंकार और हठ के कारण खुद को विनाश के साधनों में लाकर अपनी जानों पर अत्याचार करते हैं।

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