सूरह 10 · जुज़ 11
Yunus · 10:39
بَلْ كَذَّبُوا بِمَا لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ وَلَمَّا يَأْتِهِمْ تَأْوِيلُهُ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ ۖ فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
बल्कि उन्होंने उस (क़ुर्आन) को झुठला दिया, जो उनके ज्ञान के घेरे में नहीं[1] आया और न उसका परिणाम उनके सामने आया। इसी प्रकार, उन्होंने भी झुठलाया था, जो इनसे पहले थे। तो देखो कि अत्याचारियों का क्या परिणाम हुआ?
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1. अर्थात बिना सोचे समझे इसे झुठलाने के लिये तैयार हो गये।
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1. अर्थात बिना सोचे समझे इसे झुठलाने के लिये तैयार हो गये।
तफ़सीर
उन्होंने क़ुरआन को नहीं माना, बल्कि उसको समझने और उसमें मनन-चिंतन करने से पहले ही तथा जिस यातना से उन्हें डराया गया था उसके आने से पूर्व ही उन्होंने इस क़ुरआन को झुठलाने में जल्दी दिखाई, जबकि उस यातना के आने का समय क़रीब हो चुका था। इनके झुठलाने ही की तरह, पिछले समुदायों ने भी झुठलाया था, जिसके कारण उन्हें यातनाओं का सामना करना पड़ा। अतः (ऐ रसूल!) आप सोचें कि उन झुठलाने वाले समुदायों का अंत कैसा रहा? निश्चित रूप से अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया।
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