सूरह 10 · जुज़ 11
Yunus · 10:26
۞ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَىٰ وَزِيَادَةٌ ۖ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जिन लोगों ने भलाई की, उनके लिए भलाई है और कुछ बढ़कर भी। और न उनके चेहरों पर कालिक लगी हुई होगी और न उन्हें ज़िल्लत का सामना होगा। यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहेंगे[1]।
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1. अधिकांश भाष्यकारों ने "अधिक" का भावार्थ "आख़िरत में अल्लाह का दर्शन" और "भलाई" का "स्वर्ग" किया है। (इब्ने कसीर)
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1. अधिकांश भाष्यकारों ने "अधिक" का भावार्थ "आख़िरत में अल्लाह का दर्शन" और "भलाई" का "स्वर्ग" किया है। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
जिन लोगों ने अल्लाह के अनिवार्य किए हुए पूजा कार्यों (आज्ञाकारिता) को करके, तथा उसके निषिद्ध किए हुए पापों को त्यागकर अच्छा काम किया; उनके लिए सबसे अच्छा बदला अर्थात् जन्नत है, तथा उनके लिए इससे अधिक एक और वस्तु अर्थात् पवित्र अल्लाह के चेहरे के दर्शन का सौभाग्य है। और उनके चेहरों पर न धूल छाएगी और न ही उनपर तिरस्कार व अपमान छाएगा, एहसान के गुण से विशिष्ट यही लोग जन्नत वाले हैं, जिसमें वे सदैव रहेंगे।
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