सूरह 10 · जुज़ 11
Yunus · 10:23
فَلَمَّا أَنْجَاهُمْ إِذَا هُمْ يَبْغُونَ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ ۗ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّمَا بَغْيُكُمْ عَلَىٰ أَنْفُسِكُمْ ۖ مَتَاعَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُكُمْ فَنُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ
फिर जब उन्हें बचा लेता है, तो अकस्मात् धरती में अवैध विद्रोह करने लगते हैं। हे लोगो! तुम्हारा विद्रोह, तुम्हारे ही विरुध्द पड़ रहा है। ये सांसारिक जीवन के कुछ लाभ[1] हैं। फिर तुम्हें हमारी ओर फिरकर आना है। तब हम, तुम्हें बता देंगे कि तुम क्या कर रहे थे?
____________________
1. भावार्थ यह है कि जब तक संसारिक जीवन के संसाधन का कोई सहारा होता है तो लोग अल्लाह को भूले रहते हैं। और जब यह सहारा नहीं होता तो उन का अन्तरज्ञान उभरता है। और वह अल्लाह को पुकारने लगते हैं। और जब दुःख दूर हो जाता है तो फिर वही दशा हो जाती है। इस्लाम यह शिक्षा देता है कि सदा सुख दुःख में उसे याद करते रहो।
____________________
1. भावार्थ यह है कि जब तक संसारिक जीवन के संसाधन का कोई सहारा होता है तो लोग अल्लाह को भूले रहते हैं। और जब यह सहारा नहीं होता तो उन का अन्तरज्ञान उभरता है। और वह अल्लाह को पुकारने लगते हैं। और जब दुःख दूर हो जाता है तो फिर वही दशा हो जाती है। इस्लाम यह शिक्षा देता है कि सदा सुख दुःख में उसे याद करते रहो।
तफ़सीर
फिर जब वह उनकी दुआ स्वीकार कर लेता है और उन्हें उस विपत्ति से बचा लेता है, तो वे अचानक धरती में कुफ़्र, अवज्ञा और पाप करके उपद्रव करने लगते हैं। (ऐ लोगो!), होश में आ जाओ, वास्तव में तुम्हारे उपद्रव का दुष्परिणाम स्वयं तुम्हें ही झेलना है। क्योंकि तुम्हारी सरकशी व उद्दंडता से अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं होगा। तुम इस दुनिया के जीवन में उसका आनंद ले रहे हो, जबकि यह नश्वर है। फिर क़ियामत के दिन तुम्हें हमारी ही ओर लौटकर आना है। तब हम तुम्हें बताएँगे कि तुम क्या पाप कर रहे थे तथा हम तुम्हें उसका बदला देंगे।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें