सूरह 10 · जुज़ 11

Yunus · 10:19

وَمَا كَانَ النَّاسُ إِلَّا أُمَّةً وَاحِدَةً فَاخْتَلَفُوا ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِنْ رَبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ فِيمَا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ

लोग एक ही धर्म (इस्लाम) पर थे, फिर उन्होंने विभेद[1] किया और यदि आपके पालनहार की ओर से, पहले ही से एक बात निश्चित न[2] होती, तो उनके बीच उसका (संसार ही में) निर्णय कर दिया जाता, जिसमें वे विभेद कर रहे हैं।
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1. अतः कुछ शिर्क करने और देवी देवताओं को पूजने लगे। (इब्ने कसीर) 2. कि संसार में लोगों को कर्म करने का अवसर दिया जाये।

तफ़सीर

सारे मनुष्य केवल एक ही एकेश्वरवादी मोमिन समुदाय थे। फिर उन्होंने विभेद किया। अतः उनमें से कुछ लोग विश्वासी (मोमिन) बने रहे और कुछ ने कुफ़्र (अविश्वास) किया। यदि अल्लाह की तरफ से पहले ही यह निर्णय न किया जा चुका होता कि वह लोगों के बीच होने वाले मतभेद के बारे में इस दुनिया में फैसला नहीं करेगा, बल्कि उनके बीच उसके बारे में क़ियामत के दिन फ़ैसला करेगा। यदि यह बात न होती, तो इस संसार ही में उनके बीच उसका फ़ैसला कर दिया जाता, जिसमें वे विभेद कर रहे हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता कि कौन सीधे रास्ते पर चलने वाला है और कौन भटका हुआ है।

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