सूरह 10 · जुज़ 11
Yunus · 10:15
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ ۙ قَالَ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا ائْتِ بِقُرْآنٍ غَيْرِ هَٰذَا أَوْ بَدِّلْهُ ۚ قُلْ مَا يَكُونُ لِي أَنْ أُبَدِّلَهُ مِنْ تِلْقَاءِ نَفْسِي ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ ۖ إِنِّي أَخَافُ إِنْ عَصَيْتُ رَبِّي عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
और (हे नबी!) जब हमारी खुली आयतें उन्हें सुनाई जाती हैं, तो जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखते, वे कहते हैं कि इसके सिवा कोई दूसरा क़ुर्आन लाओ या इसमें परिवर्तन कर दो। उनसे कह दो कि मेरे बस में ये नहीं है कि अपनी ओर से इसमें परिवर्तन कर दूँ। मैं तो बस उस प्रकाशना का अनुयायी हूँ, जो मेरी ओर की जाती है। मैं यदि अपने पालनहार की अवज्ञा करूँ, तो मैं एक घोर दिन की यातना से डरता हूँ।
तफ़सीर
जब उनके सामने अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) को दर्शाने वाली क़ुरआन की स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो दोबारा जीवित होकर उठने का इनकार करने वाले लोग, जो सवाब की आशा नहीं रखते और न सज़ा से डरते हैं, कहते हैं : (ऐ मुहम्मद!) मूर्तिपूजा के अपमान पर आधारित इस क़ुरआन के अलावा दूसरा क़ुरआन ले आओ, अथवा हमारी इच्छाओं के अनुसार इसके कुछ भाग या पूर्ण भाग को निरस्त करके इसे बदल दो। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : इसे बदलना मेरे लिए संभव नहीं है, और इसके सिवा कोई दूसरा क़ुरआन लाने में तो मैं - और भी - सक्षम नहीं हूँ। बल्कि, केवल अल्लाह ही है जो उसमें से जो चाहे बदल सकता है। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो अल्लाह मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) भेजता है। यदि मैं तुम्हारी माँग का उत्तर देकर अल्लाह की अवज्ञा करूँ, तो मुझे एक महान दिन की सज़ा का डर है और वह क़ियामत का दिन है।
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