Ash-Shu'ara

سورة الشعراء

सूरह 26 · मक्की · 227 आयतें

26:1जुज़ 19 · पृ. 367

طسم1

ता, सीन, मीम।
26:2जुज़ 19 · पृ. 367

تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ2

ये प्रकाशमय पुस्तक की आयतें हैं।
26:3जुज़ 19 · पृ. 367

لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ3

संभवतः, आप अपना प्राण[1] खो देने वाले हैं कि वे ईमान लाने वाले नहीं हैं?
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1. अर्थात उन के ईमान न लाने के शोक में।
26:4जुज़ 19 · पृ. 367

إِنْ نَشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِمْ مِنَ السَّمَاءِ آيَةً فَظَلَّتْ أَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِعِينَ4

यदि हम चाहें, तो उतार दें उनपर आकाश से ऐसी निशानी कि उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी की झुकी रह जायें[1]।
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1. परन्तु ऐसा नहीं किया, क्यों कि दबाव का ईमान स्वीकार्य तथा मान्य नहीं होता।
26:5जुज़ 19 · पृ. 367

وَمَا يَأْتِيهِمْ مِنْ ذِكْرٍ مِنَ الرَّحْمَٰنِ مُحْدَثٍ إِلَّا كَانُوا عَنْهُ مُعْرِضِينَ5

और नहीं आती है उनके पालनहार, अति दयावान् की ओर से कोई नई शिक्षा, परन्तु वे उससे मुख फेरने वाले बन जाते हैं।
26:6जुज़ 19 · पृ. 367

فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَأْتِيهِمْ أَنْبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ6

तो उन्होंने झुठला दिया! अब उनके पास शीघ्र ही उसकी सूचनाएँ आ जायेंगी, जिसका उपहास वे कर रहे थे।
26:7जुज़ 19 · पृ. 367

أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَى الْأَرْضِ كَمْ أَنْبَتْنَا فِيهَا مِنْ كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ7

और क्या उन्होंने धरती की ओर नहीं देखा कि हमने उसमें उगाई हैं, बहुत-सी प्रत्येक प्रकार की अच्छी वनस्पतियाँ?
26:8जुज़ 19 · पृ. 367

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ8

निश्चय ही, इसमें बड़ी निशानी (लक्षण)[1] है। फिर उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
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1. अर्थात अल्लाह के सामर्थ्य की।
26:9जुज़ 19 · पृ. 367

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ9

तथा वास्तव में, आपका पालनहार ही प्रभुत्वशाली, अति दयावान् है।
26:10जुज़ 19 · पृ. 367

وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰ أَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ10

(उन्हें उस समय की कथा सुनाओ) जब पुकारा आपके पालनहार ने मूसा को कि जाओ अत्याचारी जाति[1] के पास!
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1. यह उस समय की बात है जब मूसा (अलैहिस्सलाम) दस वर्ष मद्यन में रह कर मिस्र वापिस आ रहे थे।
26:11जुज़ 19 · पृ. 367

قَوْمَ فِرْعَوْنَ ۚ أَلَا يَتَّقُونَ11

फ़िरऔन की जाति के पास, क्या वे डरते नहीं?
26:12जुज़ 19 · पृ. 367

قَالَ رَبِّ إِنِّي أَخَافُ أَنْ يُكَذِّبُونِ12

उसने कहाः मेरे पालनहार! वास्तव में, मुझे भय है कि वे मुझे झुठला देंगे।
26:13जुज़ 19 · पृ. 367

وَيَضِيقُ صَدْرِي وَلَا يَنْطَلِقُ لِسَانِي فَأَرْسِلْ إِلَىٰ هَارُونَ13

और संकुचित हो रहा है मेरा सीना और नहीं चल रही है मेरी ज़ुबान, अतः वह़्यी भेज दे हारून की ओर (भी)।
26:14जुज़ 19 · पृ. 367

وَلَهُمْ عَلَيَّ ذَنْبٌ فَأَخَافُ أَنْ يَقْتُلُونِ14

और उनका मुझपर एक अपराध भी है। अतः, मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।
26:15जुज़ 19 · पृ. 367

قَالَ كَلَّا ۖ فَاذْهَبَا بِآيَاتِنَا ۖ إِنَّا مَعَكُمْ مُسْتَمِعُونَ15

अल्लाह ने कहाः कदापि ऐसा नहीं होगा। तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ, हम तुम्हारे साथ सुनने[1] वाले हैं।
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1. अर्थात तुम दोनों की सहायता करते रहेंगे।
26:16जुज़ 19 · पृ. 367

فَأْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَا إِنَّا رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ16

तो तुम दोनों जाओ और कहो कि हम विश्व के पालनहार के भेजे हुए (रसूल) हैं।
26:17जुज़ 19 · पृ. 367

أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ17

कि तू हमारे साथ बनी इस्राईल को जाने दे।
26:18जुज़ 19 · पृ. 367

قَالَ أَلَمْ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدًا وَلَبِثْتَ فِينَا مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ18

(फ़िरऔन ने) कहाः क्या हमने तेरा पालन नहीं किया है, अपने यहाँ बाल्यवस्था में और तू (नहीं) रहा है, हममें अपनी आयु के कई वर्ष?
26:19जुज़ 19 · पृ. 367

وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ الَّتِي فَعَلْتَ وَأَنْتَ مِنَ الْكَافِرِينَ19

और तू कर गया वह कार्य,[1] जो किया और तू कृतघनों में से है!
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1. यह उस हत्या काण्ड की ओर संकेत है जो मूसा (अलैहिस्सलाम) से नबी होने से पहले हो गया था। (देखियेः सूरह क़स़स़)
26:20जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ فَعَلْتُهَا إِذًا وَأَنَا مِنَ الضَّالِّينَ20

(मूसा ने) कहाः मैंने ऐसा उस समय कर दिया, जबकि मैं अनजान था।
26:21जुज़ 19 · पृ. 368

فَفَرَرْتُ مِنْكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ لِي رَبِّي حُكْمًا وَجَعَلَنِي مِنَ الْمُرْسَلِينَ21

फिर मैं तुमसे भाग गया, जब तुमसे भय हुआ। फिर प्रदान कर दिया मुझे, मेरे पालनहार ने तत्वदर्शिता और मुझे बना दिया रसूलों में से।
26:22जुज़ 19 · पृ. 368

وَتِلْكَ نِعْمَةٌ تَمُنُّهَا عَلَيَّ أَنْ عَبَّدْتَ بَنِي إِسْرَائِيلَ22

और ये कोई उपकार है, जो तू मुझे जता रहा है कि तूने दास बना लिया है, इस्राईल के पुत्रों को।
26:23जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ فِرْعَوْنُ وَمَا رَبُّ الْعَالَمِينَ23

फ़िरऔन ने कहाः विश्व का पालनहार क्या है?
26:24जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِنْ كُنْتُمْ مُوقِنِينَ24

(मूसा ने) कहाः आकाशों तथा धरती और उसका पालनहार, जो कुछ दोनों के बीच है, यदि तुम विश्वास रखने वाले हो।
26:25जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُ أَلَا تَسْتَمِعُونَ25

उसने उनसे कहा, जो उसके आस-पास थेः क्या तुम सुन नहीं रहे हो?
26:26जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ26

(मुसा ने) कहाः तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पूर्वोजों का पालनहार है।
26:27जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ الَّذِي أُرْسِلَ إِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ27

(फ़िरऔन ने) कहाः वास्तव में, तुम्हारा रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, पागल है।
26:28जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِنْ كُنْتُمْ تَعْقِلُونَ28

(मूसा ने) कहाः वह, पूर्व तथा पश्चिम तथा दोनों के मध्य जो कुछ है, सबका पालनहार है।
26:29जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلَٰهًا غَيْرِي لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ29

(फ़िरऔन ने) कहाः यदि तूने कोई पूज्य बना लिया मेरे अतिरिक्त, तो तुझे बंदियों में कर दूँगा।
26:30जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُبِينٍ30

(मूसा ने) कहाः क्या यद्यपि मैं ले आऊँ तेरे पास एक खुली चीज़?
26:31जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ فَأْتِ بِهِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ31

उसने कहाः तू उसे ले आ, यदि सच्चा है।
26:32जुज़ 19 · पृ. 368

فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُبِينٌ32

फिर उसने अपनी लाठी फेंक दी, तो अकस्मात वह एक प्रत्यक्ष अजगर बन गयी।
26:33जुज़ 19 · पृ. 368

وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ33

तथा अपना हाथ निकाला, तो अकस्मात वह उज्ज्वल था, देखने वालों के लिए।
26:34जुज़ 19 · पृ. 368

قَالَ لِلْمَلَإِ حَوْلَهُ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ34

उसने अपने प्रमुखों से कहा, जो उसके पास थेः वास्तव में, ये तो बड़ा दक्ष जादूगर है।
26:35जुज़ 19 · पृ. 368

يُرِيدُ أَنْ يُخْرِجَكُمْ مِنْ أَرْضِكُمْ بِسِحْرِهِ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ35

ये चाहता है कि तुम्हें, तुम्हारी धरती से निकाल[1] दे, अपने जादू के बल से, तो अब तुम क्या आदेश देते हो?
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1. अर्थात यह उग्रवाद कर के हमारे देश पर अधिकार कर ले।
26:36जुज़ 19 · पृ. 368

قَالُوا أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَابْعَثْ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ36

सबने कहाः अवसर (समय) दो मूसा और उसके भाई (के विषय) को और भेज दो नगरों में एकत्र करने वालों को।
26:37जुज़ 19 · पृ. 368

يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَلِيمٍ37

वे तुम्हारे पास प्रत्येक बड़े दक्ष जादूगर को लायें।
26:38जुज़ 19 · पृ. 368

فَجُمِعَ السَّحَرَةُ لِمِيقَاتِ يَوْمٍ مَعْلُومٍ38

तो एकत्र कर लिए गये जादूगर एक निश्चित दिन के समय के लिए।
26:39जुज़ 19 · पृ. 368

وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلْ أَنْتُمْ مُجْتَمِعُونَ39

तथा लोगों से कहा गया कि क्या तुम एकत्र होने वाले[1] हो?
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1. अर्थात लोगों को प्रेरणा दी जा रही है कि इस प्रतियोगिता में अवश्य उपस्थित हों।
26:40जुज़ 19 · पृ. 369

لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ السَّحَرَةَ إِنْ كَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ40

ताकि हम पीछे चलें जादूगरों के यदि वही प्रभुत्वशाली (विजयी) हो जायें।
26:41जुज़ 19 · पृ. 369

فَلَمَّا جَاءَ السَّحَرَةُ قَالُوا لِفِرْعَوْنَ أَئِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِنْ كُنَّا نَحْنُ الْغَالِبِينَ41

और जब जादूगर आये, तो फ़िरऔन से कहाः क्या हमें कुछ पुरस्कार मिलेगा, यदि हम ही प्रभुत्वशाली होंगे?
26:42जुज़ 19 · पृ. 369

قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ إِذًا لَمِنَ الْمُقَرَّبِينَ42

उसने कहाः हाँ! और तुम उस समय (मेरे) समीपवर्तियों में हो जाओगे।
26:43जुज़ 19 · पृ. 369

قَالَ لَهُمْ مُوسَىٰ أَلْقُوا مَا أَنْتُمْ مُلْقُونَ43

मूसा ने उनसे कहाः फेंको, जो कुछ तुम फेंकने वाले हो।
26:44जुज़ 19 · पृ. 369

فَأَلْقَوْا حِبَالَهُمْ وَعِصِيَّهُمْ وَقَالُوا بِعِزَّةِ فِرْعَوْنَ إِنَّا لَنَحْنُ الْغَالِبُونَ44

तो उन्होंने फेंक दी उपनी रस्सियाँ तथा अपनी लाठियाँ तथा कहाः फ़िरऔन के प्रभुत्व की शपथ! हम ही अवश्य प्रभुत्वशाली (विजयी) होंगे।
26:45जुज़ 19 · पृ. 369

فَأَلْقَىٰ مُوسَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ تَلْقَفُ مَا يَأْفِكُونَ45

अब मूसा ने फेंक दी अपनी लाठी, तो तत्क्षण वह निगलने लगी (उसे), जो झूठ वे बना रहे थे।
26:46जुज़ 19 · पृ. 369

فَأُلْقِيَ السَّحَرَةُ سَاجِدِينَ46

तो गिर गये सभी जादूगर[1] सज्दा करते हुए।
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1. क्यों कि उन्हें विश्वास हो गया कि मूसा (अलैहिस्सलाम) जादूगर नहीं, बल्कि वह सत्य के उपदेशक हैं।
26:47जुज़ 19 · पृ. 369

قَالُوا آمَنَّا بِرَبِّ الْعَالَمِينَ47

और सबने कह दियाः हम विश्व के पालनहार पर ईमान लाये।
26:48जुज़ 19 · पृ. 369

رَبِّ مُوسَىٰ وَهَارُونَ48

मूसा तथा हारून के पालनहार पर।
26:49जुज़ 19 · पृ. 369

قَالَ آمَنْتُمْ لَهُ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُ لَكَبِيرُكُمُ الَّذِي عَلَّمَكُمُ السِّحْرَ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ مِنْ خِلَافٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ49

(फ़िरऔन ने) कहाः तुम उसका विश्वास कर बैठे, इससे पहले कि मैं तुम्हें आज्ञा दूँ? वास्तव में, वह तुम्हारा बड़ा (गुरू) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है, तो तुम्हें शीघ्र ज्ञान हो जायेगा, मैं अवश्य तुम्हारे हाथों तथा पैरों को विपरीत दिशा[1] से काट दूँगा तथा तुम सभी को फाँसी दे दूँगा!
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1. अर्थात दाँया हाथ और बायाँ पैर या बायाँ हाथ और दायाँ पैर।
26:50जुज़ 19 · पृ. 369

قَالُوا لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنْقَلِبُونَ50

सबने कहाः कोई चिन्ता नहीं, हमतो अपने पालनहार हीकी ओर फिरकर जाने वाले हैं।
26:51जुज़ 19 · पृ. 369

إِنَّا نَطْمَعُ أَنْ يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَا أَنْ كُنَّا أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ51

हम आशा रखते हैं कि क्षमा कर देगा, हमारे लिए, हमारा पालनहार, हमारे पापों को, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाने वाले हैं।
26:52जुज़ 19 · पृ. 369

۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي إِنَّكُمْ مُتَّبَعُونَ52

और हमने मूसा की ओर वह़्यी की कि रातों-रात निकल जा मेरे भक्तों को लेकर, तुम सबका पीछा किया जायेगा।
26:53जुज़ 19 · पृ. 369

فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ53

तो फ़िरऔन ने भेज दिया नगरों में (सेना) एकत्र करने[1] वालों को।
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1. जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के आदेशानुसार अपने साथियों को ले कर निकल गये तो फ़िरऔन ने उन का पीछा करने के लिये नगरों में हरकारे भेजे।
26:54जुज़ 19 · पृ. 369

إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ54

कि वे बहुत थोड़े लोग हैं।
26:55जुज़ 19 · पृ. 369

وَإِنَّهُمْ لَنَا لَغَائِظُونَ55

और (इसपर भी) वे हमें अति क्रोधित कर रहे हैं।
26:56जुज़ 19 · पृ. 369

وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَاذِرُونَ56

और वास्तव में, हम एक गिरोह हैं सावधान रहने वाले।
26:57जुज़ 19 · पृ. 369

فَأَخْرَجْنَاهُمْ مِنْ جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ57

अन्ततः, हमने निकाल दिया उन्हें, बागों तथा स्रोतों से।
26:58जुज़ 19 · पृ. 369

وَكُنُوزٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ58

तथा कोषों और उत्तम निवास स्थानों से।
26:59जुज़ 19 · पृ. 369

كَذَٰلِكَ وَأَوْرَثْنَاهَا بَنِي إِسْرَائِيلَ59

इसी प्रकार हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी बना दिया, इस्राईल की संतान को।
26:60जुज़ 19 · पृ. 369

فَأَتْبَعُوهُمْ مُشْرِقِينَ60

तो उन्होंने उनका पीछा किया, प्रातः होते ही।
26:61जुज़ 19 · पृ. 370

فَلَمَّا تَرَاءَى الْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَابُ مُوسَىٰ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ61

और जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया, तो मूसा के साथियों ने कहाः हमतो निश्चय ही पकड़ लिए[1] गये।
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1. क्यों कि अब सामने सागर और पीछे फ़िरऔन की सेना थी।
26:62जुज़ 19 · पृ. 370

قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ62

(मूसा ने) कहाः कदापि नहीं, निश्चय मेरे साथ मेरा पालनहार है।
26:63जुज़ 19 · पृ. 370

فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِبْ بِعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانْفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ63

तो हमने मूसा को वह़्यी की कि मार अपनी लाठी से सागर को, अकस्मात् सागर फट गया तथा प्रत्येक भाग, भारी पर्वत के समान[1] हो गया।
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1. अर्थात बीच से मार्ग बन गया और दोनों ओर पानी पर्वत के समान खड़ा हो गया।
26:64जुज़ 19 · पृ. 370

وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ64

तथा हमने समीप कर दिया उसी स्थान के, दूसरे गिरोह को।
26:65जुज़ 19 · पृ. 370

وَأَنْجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَنْ مَعَهُ أَجْمَعِينَ65

और मुक्ति प्रदान कर दी मूसा और उसके सब साथियों को।
26:66जुज़ 19 · पृ. 370

ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ66

फिर हमने डुबो दिया दूसरों को।
26:67जुज़ 19 · पृ. 370

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ67

वास्तव में, इसमें बड़ी शिक्षा है और उनमें से अधिक्तर लोग ईमान वाले नहीं थे।
26:68जुज़ 19 · पृ. 370

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ68

तथा वास्तव में, आपका पालनहार निश्चय अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
26:69जुज़ 19 · पृ. 370

وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ إِبْرَاهِيمَ69

तथा आप, उन्हें सुना दें, इब्राहीम का समाचार (भी)।
26:70जुज़ 19 · पृ. 370

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَا تَعْبُدُونَ70

जब उसने कहा, अपने बाप तथा अपनी जाति से कि तुम क्या पूज रहे हो?
26:71जुज़ 19 · पृ. 370

قَالُوا نَعْبُدُ أَصْنَامًا فَنَظَلُّ لَهَا عَاكِفِينَ71

उन्होंने कहाः हम मूर्तियों की पूजा कर रहे हैं और उन्हीं की सेवा में लगे रहते हैं।
26:72जुज़ 19 · पृ. 370

قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ إِذْ تَدْعُونَ72

उसने कहाः क्या वे तुम्हारी सुनती हैं, जब तुम पुकारते हो?
26:73जुज़ 19 · पृ. 370

أَوْ يَنْفَعُونَكُمْ أَوْ يَضُرُّونَ73

या तुम्हें लाभ पहुँचाती या हानि पहुँचाती हैं?
26:74जुज़ 19 · पृ. 370

قَالُوا بَلْ وَجَدْنَا آبَاءَنَا كَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ74

उन्होंने कहाः बल्कि हमने अपने पूर्वोजों को ऐसा ही करते हुए पाया है।
26:75जुज़ 19 · पृ. 370

قَالَ أَفَرَأَيْتُمْ مَا كُنْتُمْ تَعْبُدُونَ75

उसने कहाः क्या तुमने कभी (आँख खोलकर) उसे देखा, जिसे तुम पूज रहे हो।
26:76जुज़ 19 · पृ. 370

أَنْتُمْ وَآبَاؤُكُمُ الْأَقْدَمُونَ76

तुम तथा तुम्हारे पहले पूर्वज?
26:77जुज़ 19 · पृ. 370

فَإِنَّهُمْ عَدُوٌّ لِي إِلَّا رَبَّ الْعَالَمِينَ77

क्योंकि ये सब मेरे शत्रु हैं, पूरे विश्व के पालनहार के सिवा।
26:78जुज़ 19 · पृ. 370

الَّذِي خَلَقَنِي فَهُوَ يَهْدِينِ78

जिसने मुझे पैदा किया, फिर वही मुझे मार्ग दर्शा रहा है।
26:79जुज़ 19 · पृ. 370

وَالَّذِي هُوَ يُطْعِمُنِي وَيَسْقِينِ79

और जो मुझे खिलाता और पिलाता है।
26:80 · When I am ill, it is He who heals meजुज़ 19 · पृ. 370

وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ80

और जब रोगी होता हूँ, तो वही मुझे स्वस्थ करता है।
26:81जुज़ 19 · पृ. 370

وَالَّذِي يُمِيتُنِي ثُمَّ يُحْيِينِ81

तथा वही मुझे मारेगा, फिर[1] मुझे जीवित करेगा।
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1. अर्थात प्रलय के दिन अपने कर्मों का फल भोगने के लिये।
26:82जुज़ 19 · पृ. 370

وَالَّذِي أَطْمَعُ أَنْ يَغْفِرَ لِي خَطِيئَتِي يَوْمَ الدِّينِ82

तथा मैं आशा रखता हूँ कि क्षमा कर देगा, मेरे लिए, मेरे पाप, प्रतिकार (प्रलय) के दिन।
26:83जुज़ 19 · पृ. 370

رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ83

हे मेरे पालनहार! प्रदान कर दे मुझे तत्वदर्शिता और मुझे सम्मिलित कर सदाचारियों में।
26:84जुज़ 19 · पृ. 371

وَاجْعَلْ لِي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِينَ84

और मुझे सच्ची ख्याति प्रदान कर, आगामी लोगों में।
26:85जुज़ 19 · पृ. 371

وَاجْعَلْنِي مِنْ وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ85

और बना दे मुझे, सुख के स्वर्ग का उत्तराधिकारी।
26:86जुज़ 19 · पृ. 371

وَاغْفِرْ لِأَبِي إِنَّهُ كَانَ مِنَ الضَّالِّينَ86

तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे,[1] वास्तव में, वह कुपथों में से है।
____________________
1. (देखियेः सूरह तौबा, आयतः114)
26:87जुज़ 19 · पृ. 371

وَلَا تُخْزِنِي يَوْمَ يُبْعَثُونَ87

तथा मुझे निरादर न कर, जिस दिन सब जीवित किये[1] जायेंगे।
____________________
1. ह़दीस में वर्णित है कि प्रलय के दिन इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने बाप से मिलेंगे। और कहेंगेः हे मेरे पालनहार! तू ने मुझे वचन दिया था कि मुझे पुनः जीवित होने के दिन अपमानित नहीं करेगा। तो अल्लाह कहेगाः मैं ने स्वर्ग को काफ़िरों के लिये अवैध कर दिया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः4769)
26:88जुज़ 19 · पृ. 371

يَوْمَ لَا يَنْفَعُ مَالٌ وَلَا بَنُونَ88

जिस दिन, लाभ नहीं देगा कोई धन और न संतान।
26:89जुज़ 19 · पृ. 371

إِلَّا مَنْ أَتَى اللَّهَ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ89

परन्तु, जो अल्लाह के पास स्वच्छ दिल लेकर आयेगा।
26:90जुज़ 19 · पृ. 371

وَأُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ90

और समीप कर दी जायेगी स्वर्ग आज्ञाकारियों के लिए।
26:91जुज़ 19 · पृ. 371

وَبُرِّزَتِ الْجَحِيمُ لِلْغَاوِينَ91

तथा खोल दी जायेगी नरक कुपथों के लिए।
26:92जुज़ 19 · पृ. 371

وَقِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنْتُمْ تَعْبُدُونَ92

तथा कहा जायेगाः कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम पूज रहे थे?
26:93जुज़ 19 · पृ. 371

مِنْ دُونِ اللَّهِ هَلْ يَنْصُرُونَكُمْ أَوْ يَنْتَصِرُونَ93

अल्लाह के सिवा, क्या वे तुम्हारी सहायता करेंगे अथवा स्वयं अपनी सहायता कर सकते हैं?
26:94जुज़ 19 · पृ. 371

فَكُبْكِبُوا فِيهَا هُمْ وَالْغَاوُونَ94

फिर उसमें औंधे झोंक दिये जायेंगे वे और सभी कुपथ।
26:95जुज़ 19 · पृ. 371

وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ95

और इब्लीस की सेना सभी।
26:96जुज़ 19 · पृ. 371

قَالُوا وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ96

और वे उसमें आपस में झगड़ते हुए कहंगेः
26:97जुज़ 19 · पृ. 371

تَاللَّهِ إِنْ كُنَّا لَفِي ضَلَالٍ مُبِينٍ97

अल्लाह की शपथ! वास्तव में, हम खुले कुपथ में थे।
26:98जुज़ 19 · पृ. 371

إِذْ نُسَوِّيكُمْ بِرَبِّ الْعَالَمِينَ98

जब हम तुम्हें, बराबर समझ रहे थे विश्व के पालनहार के।
26:99जुज़ 19 · पृ. 371

وَمَا أَضَلَّنَا إِلَّا الْمُجْرِمُونَ99

और हमें कुपथ नहीं किया, परन्तु अपराधियों ने।
26:100जुज़ 19 · पृ. 371

فَمَا لَنَا مِنْ شَافِعِينَ100

तो हमारा कोई अभिस्तावक (सिफ़ारिशी) नहीं रह गया।
26:101जुज़ 19 · पृ. 371

وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍ101

तथा न कोई प्रेमी मित्र।
26:102जुज़ 19 · पृ. 371

فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ102

तो यदि हमें पुनः संसार में जाना होता,[1] तो हम ईमान वालों में हो जाते।
____________________
1. इस आयत में संकेत है कि संसार में एक ही जीवन कर्म के लिये मिलता है। और दूसरा जीवन प्रलोक में कर्मों के फल के लिये मिलेगा।
26:103जुज़ 19 · पृ. 371

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ103

निःसंदेह, इसमें बड़ी निशानी है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
26:104जुज़ 19 · पृ. 371

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ104

और वास्तव में, आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली,[1] दयावान् है।
____________________
1. परन्तु लोग स्वयं अत्याचार कर के नरक के भागी बन रहे हैं।
26:105जुज़ 19 · पृ. 371

كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ الْمُرْسَلِينَ105

नूह़ की जाति ने भी रसूलों को झुठलाया।
26:106जुज़ 19 · पृ. 371

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ106

जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहाः क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं हो?
26:107जुज़ 19 · पृ. 371

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ107

वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक[1] रसूल हूँ।
____________________
1. अल्लाह का संदेश बिना कमी और अधिक्ता के तुम्हें पहूँचा रहा हूँ।
26:108जुज़ 19 · पृ. 371

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ108

अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।
26:109जुज़ 19 · पृ. 371

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ109

मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला), मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
26:110जुज़ 19 · पृ. 371

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ110

अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।
26:111जुज़ 19 · पृ. 371

۞ قَالُوا أَنُؤْمِنُ لَكَ وَاتَّبَعَكَ الْأَرْذَلُونَ111

उन्होंने कहाः क्या हम तुझे मान लें, जबकि तेरा अनुसरण पतित (नीच) लोग[1] कर रहे हैं?
____________________
1. अर्थात धनी नहीं, निर्धन लोग कर रहे हैं।
26:112जुज़ 19 · पृ. 372

قَالَ وَمَا عِلْمِي بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ112

(नूह़ ने) कहाः मूझे क्य ज्ञान कि वे क्या कर्म करते रहे हैं?
26:113जुज़ 19 · पृ. 372

إِنْ حِسَابُهُمْ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّي ۖ لَوْ تَشْعُرُونَ113

उनका ह़िसाब तो बस मेरे पालनहार के ऊपर है, यदि तुम समझो।
26:114जुज़ 19 · पृ. 372

وَمَا أَنَا بِطَارِدِ الْمُؤْمِنِينَ114

और मैं धुतकारने वाला[1] नहीं हूँ, ईमान वालों को।
____________________
1. अर्थात मैं हीन वर्ग के लोगों को जो ईमान लाये हैं अपने से दूर नहीं कर सकता जैसा कि तुम चाहते हो।
26:115जुज़ 19 · पृ. 372

إِنْ أَنَا إِلَّا نَذِيرٌ مُبِينٌ115

मैं तो बस खुला सावधान करने वाला हूँ।
26:116जुज़ 19 · पृ. 372

قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا نُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ116

उन्होंने कहाः यदि रुका नहीं, हे नूह़! तो तू अवश्य पथराव करके मारे हुओं में होगा।
26:117जुज़ 19 · पृ. 372

قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوْمِي كَذَّبُونِ117

उसने कहाः मेरे पालनहार! मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया।
26:118जुज़ 19 · पृ. 372

فَافْتَحْ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِي وَمَنْ مَعِيَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ118

अतः, तू निर्णय कर दे मेरे और उनके बीच और मुक्त कर दे मुझे तथा उन्हें जो मेरे साथ हैं, ईमान वालों में से।
26:119जुज़ 19 · पृ. 372

فَأَنْجَيْنَاهُ وَمَنْ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ119

तो हमने उसे मुक्त कर दिया तथा उन्हें जो उसके साथ भरी नाव में थे।
26:120जुज़ 19 · पृ. 372

ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ120

फिर हमने डुबो दिया उसके पश्चात्, शेष लोगों को।
26:121जुज़ 19 · पृ. 372

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ121

वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है तथा उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं।
26:122जुज़ 19 · पृ. 372

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ122

और निश्चय आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
26:123जुज़ 19 · पृ. 372

كَذَّبَتْ عَادٌ الْمُرْسَلِينَ123

झुठला दिया आद (जाति) ने (भी) रसूलों को।
26:124जुज़ 19 · पृ. 372

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ124

जब कहा उनसे, उनके भाई हूद[1] नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
____________________
1. आद जाति के नबी हूद (अलैहिस्सलाम) को उन का भाई कहा गया है क्यों कि वह भी उन्हीं के समुदाय में से थे।
26:125जुज़ 19 · पृ. 372

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ125

वस्तुतः, मैं तुम्हारे लिए एक न्यासिक (अमानतदार) रसूल हूँ।
26:126जुज़ 19 · पृ. 372

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ126

अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
26:127जुज़ 19 · पृ. 372

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ127

और मैं तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
26:128जुज़ 19 · पृ. 372

أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ آيَةً تَعْبَثُونَ128

क्यों तुम बना लेते हो, हर ऊँचे स्थान पर एक यादगार भवन, व्यर्थ में?
26:129जुज़ 19 · पृ. 372

وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ129

तथा बनाते हो, बड़े-बड़े भवन, जैसे कि तुम सदा रहोगे।
26:130जुज़ 19 · पृ. 372

وَإِذَا بَطَشْتُمْ بَطَشْتُمْ جَبَّارِينَ130

और जबकिसी को पकड़ते हो, तो पकड़ते हो, महा अत्याचारी बनकर।
26:131जुज़ 19 · पृ. 372

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ131

तो अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।
26:132जुज़ 19 · पृ. 372

وَاتَّقُوا الَّذِي أَمَدَّكُمْ بِمَا تَعْلَمُونَ132

तथा उससे भय रखो, जिसने तुम्हारी सहायता की है उससे, जो तुम जानते हो।
26:133जुज़ 19 · पृ. 372

أَمَدَّكُمْ بِأَنْعَامٍ وَبَنِينَ133

उसने सहायता की है तुम्हारी चौपायों तथा संतान से।
26:134जुज़ 19 · पृ. 372

وَجَنَّاتٍ وَعُيُونٍ134

तथा बाग़ों (उद्यानो) तथा जल स्रोतों से।
26:135जुज़ 19 · पृ. 372

إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ135

मैं तुमपर डरता हूँ, भीषण दिन की यातना से।
26:136जुज़ 19 · पृ. 372

قَالُوا سَوَاءٌ عَلَيْنَا أَوَعَظْتَ أَمْ لَمْ تَكُنْ مِنَ الْوَاعِظِينَ136

उन्होंने कहाः नसीह़त करो या न करो, हमपर सब समान है।
26:137जुज़ 19 · पृ. 373

إِنْ هَٰذَا إِلَّا خُلُقُ الْأَوَّلِينَ137

ये बात तो बस प्राचीन लोगों की नीति[1] है।
____________________
1. अर्थात प्राचीन युग से होती चली आ रही है।
26:138जुज़ 19 · पृ. 373

وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ138

और हम उनमें से नहीं हैं, जिन्हें यातना दी जायेगी।
26:139जुज़ 19 · पृ. 373

فَكَذَّبُوهُ فَأَهْلَكْنَاهُمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ139

अन्ततः, उन्होंने हमें झुठला दिया, तो हमने उन्हें ध्वस्त कर दिया। निश्चय इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और लोगों में अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।
26:140जुज़ 19 · पृ. 373

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ140

और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
26:141जुज़ 19 · पृ. 373

كَذَّبَتْ ثَمُودُ الْمُرْسَلِينَ141

झुठला दिया समूद ने (भी)[1] रसूलों को।
____________________
1. यहाँ यह बात याद रखने की है कि एक रसूल का इन्कार सभी रसूलों का इन्कहार है क्यों कि सब का उपदेश एक ही था।
26:142जुज़ 19 · पृ. 373

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ صَالِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ142

जब कहा उनसे उनके भाई सालेह़ नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
26:143जुज़ 19 · पृ. 373

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ143

वास्तव में, मैं तुम्हारा विश्वसनीय रसूल हूँ।
26:144जुज़ 19 · पृ. 373

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ144

तो तुम अल्लाह से डरो और मेरा कहा मानो।
26:145जुज़ 19 · पृ. 373

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ145

तथा मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
26:146जुज़ 19 · पृ. 373

أَتُتْرَكُونَ فِي مَا هَاهُنَا آمِنِينَ146

क्या तुम छोड़ दिये जाओगे उसमें, जो यहाँ हैं निश्चिन्त रहकर?
26:147जुज़ 19 · पृ. 373

فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ147

बाग़ों तथा स्रोतों में।
26:148जुज़ 19 · पृ. 373

وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَضِيمٌ148

तथा खेतों और खजूरों में, जिनके गुच्छे रस भरे हैं।
26:149जुज़ 19 · पृ. 373

وَتَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا فَارِهِينَ149

तथा तुमपर्वतों को तराशकर घर बनाते हो, गर्व करते हुए।
26:150जुज़ 19 · पृ. 373

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ150

अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
26:151जुज़ 19 · पृ. 373

وَلَا تُطِيعُوا أَمْرَ الْمُسْرِفِينَ151

और पालन न करो उल्लंघनकारियों के आदेश का।
26:152जुज़ 19 · पृ. 373

الَّذِينَ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ152

जो उपद्रव करते हैं धरती में और सुधार नहीं करते।
26:153जुज़ 19 · पृ. 373

قَالُوا إِنَّمَا أَنْتَ مِنَ الْمُسَحَّرِينَ153

उन्होंने कहाः वास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।
26:154जुज़ 19 · पृ. 373

مَا أَنْتَ إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَا فَأْتِ بِآيَةٍ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ154

तू तो बस हमारे समान एक मानव है। तो कोई चमत्कार ले आ, यदि तू सच्चा है।
26:155जुज़ 19 · पृ. 373

قَالَ هَٰذِهِ نَاقَةٌ لَهَا شِرْبٌ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍ مَعْلُومٍ155

कहाः ये ऊँटनी है,[1] इसके लिए पानी पीने का एक दिन है और तुम्हारे लिए पानी लेने का निश्चित दिन है।
____________________
1. अर्थता यह ऊँटनी चमत्कार है जो उन की माँग पर पत्थर से निकली थी।
26:156जुज़ 19 · पृ. 373

وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظِيمٍ156

तथा उसे हाथ न लगाना बुराई से, अन्यथा तुम्हें पकड़ लेगी एक भीषण दिन की यातना।
26:157जुज़ 19 · पृ. 373

فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا نَادِمِينَ157

तो उन्होंने वध कर दिया उसे, अन्ततः, पछताने वाले हो गये।
26:158जुज़ 19 · पृ. 373

فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ158

और पकड़ लिया उन्हें यातना ने। वस्तुतः, इसमें बड़ी निशानी है और नहीं थे उनमें से अधिक्तर ईमान वाले।
26:159जुज़ 19 · पृ. 373

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ159

और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
26:160जुज़ 19 · पृ. 374

كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ الْمُرْسَلِينَ160

झुठला दिया लूत की जाति ने (भी) रसूलों को।
26:161जुज़ 19 · पृ. 374

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ161

जब कहा उनसे उनके भाई लूत नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
26:162जुज़ 19 · पृ. 374

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ162

वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
26:163जुज़ 19 · पृ. 374

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ163

अतः अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।
26:164जुज़ 19 · पृ. 374

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ164

और मैं तुमसे प्रश्न नहीं करता, इसपर किसी पारिश्रमिक (बदले) का। मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।
26:165जुज़ 19 · पृ. 374

أَتَأْتُونَ الذُّكْرَانَ مِنَ الْعَالَمِينَ165

क्या तुम जाते[1] हो पुरुषों के पास, संसार वासियों में से।
____________________
1. इस कुकर्म का आरंभ संसार में लूत (अलैहिस्सलाम) की जाति से हुआ। और अब यह कुकर्म पूरे विश्व में विशेष रूप से यूरोपीय सभ्य देशों में व्यापक है। और समलैंगिक विवाह को यूरोप के बहुत से देशों में वैध मान लिया गया है। जिस के कारण कभी भी उन पर अल्लाह की यातना आ सकती है।
26:166जुज़ 19 · पृ. 374

وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُمْ مِنْ أَزْوَاجِكُمْ ۚ بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ166

तथा छोड़ देते हो उसे, जिसे पैदा किया है तुम्हारे पालनहार ने, अर्थात अपनी प्तनियों को, बल्कि तुम एक जाति हो, सीमा का उल्लंघन करने वाली।
26:167जुज़ 19 · पृ. 374

قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا لُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمُخْرَجِينَ167

उन्होंने कहाः यदि तू नहीं रुका, हे लूत! तो अवश्य तेरा बहिष्कार कर दिया जायेगा।
26:168जुज़ 19 · पृ. 374

قَالَ إِنِّي لِعَمَلِكُمْ مِنَ الْقَالِينَ168

उसने कहाः वास्तव में, मैं तुम्हारे करतूत से बहुत अप्रसन्न हूँ।
26:169जुज़ 19 · पृ. 374

رَبِّ نَجِّنِي وَأَهْلِي مِمَّا يَعْمَلُونَ169

मेरे पालनहार! मुझे बचा ले तथा मेरे परिवार को उससे, जो वे कर रहे हैं।
26:170जुज़ 19 · पृ. 374

فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ170

तो हमने उसे बचा लिया तथा उसके सभी परिवार को।
26:171जुज़ 19 · पृ. 374

إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ171

परन्तु, एक बुढ़िया[1] को, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
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1. इस से अभिप्रेत लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।
26:172जुज़ 19 · पृ. 374

ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ172

फिर हमने विनाश कर दिया दूसरों का।
26:173जुज़ 19 · पृ. 374

وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ مَطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنْذَرِينَ173

और वर्षा की उनपर, एक घोर[1] वर्षा। तो बुरी हो गयी डराये हुए लोगों की वर्षा।
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1. अर्थात पत्थरों की वर्षा। (देखियेः सूरह हूद, आयतः82-83)
26:174जुज़ 19 · पृ. 374

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ174

वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं थे।
26:175जुज़ 19 · पृ. 374

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ175

और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
26:176जुज़ 19 · पृ. 374

كَذَّبَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ الْمُرْسَلِينَ176

झुठला दिया ऐय्का[1] वालों ने रसूलों को।
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1. ऐय्का का अर्थ झाड़ी है। यह मद्यन का क्षेत्र है जिस में शोऐब अलैहिस्सलाम को भेजा गया था।
26:177जुज़ 19 · पृ. 374

إِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ أَلَا تَتَّقُونَ177

जब कहा उनसे शोऐब नेः क्या तुम डरते नहीं हो?
26:178जुज़ 19 · पृ. 374

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ178

मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ।
26:179जुज़ 19 · पृ. 374

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ179

अतः, अल्लाह से डरो तथा मेरी आज्ञा का पालन करो।
26:180जुज़ 19 · पृ. 374

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ180

और मैं नहीं माँगता तुमसे इसपर कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस समस्त विश्व के पालनहार पर है।
26:181जुज़ 19 · पृ. 374

۞ أَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِرِينَ181

तुम नाप-तोल पूरा करो और न बनो कम देने वालों में।
26:182जुज़ 19 · पृ. 374

وَزِنُوا بِالْقِسْطَاسِ الْمُسْتَقِيمِ182

और तोलो सीधी तराज़ू से।
26:183जुज़ 19 · पृ. 374

وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ183

और मत कम दो लोगों को उनकी चीज़ें और मत फिरो धरती में उपद्रव फैलाते।
26:184जुज़ 19 · पृ. 375

وَاتَّقُوا الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالْجِبِلَّةَ الْأَوَّلِينَ184

और डरो उससे, जिसने पैदा किया है तुम्हें तथा अगले लोगों को।
26:185जुज़ 19 · पृ. 375

قَالُوا إِنَّمَا أَنْتَ مِنَ الْمُسَحَّرِينَ185

उन्होंने कहाःवास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।
26:186जुज़ 19 · पृ. 375

وَمَا أَنْتَ إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَا وَإِنْ نَظُنُّكَ لَمِنَ الْكَاذِبِينَ186

और तू तो बस एक पुरुष[1] है, हमारे समान और हम तो तुझे झूठों में समझते हैं।
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1. यहाँ यह बात विचारणीय है कि सभी विगत जातियों ने अपने रसूलों को उन के मानव होने के कारण नकार दिया। और जिस ने स्वीकार भी किया तो उस ने कुछ युग व्यतीत होने के पश्चात् अति कर के अपने रसूलों को प्रभु अथवा प्रभु का अंश बना कर उन्हीं को पूज्य बना लिया। तथा एकेश्वरवाद को कड़ा आघात पहुँचा कर मिश्रणवाद का द्वार खोल लिया और कुपथ हो गये। वर्तमान युग में भी इसी का प्रचलन है और इस का आधार अपने पूर्वजों की रीतियों को बनाया जाता है। इस्लाम इसी कुपथ का निवारण कर के एकेश्वरवाद की स्थापना के लिये आया है और वास्तव में यही सत्धर्म है। ह़दीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः मूझे वैसे न बढ़ा चढ़ाना जैसे ईसाईयों ने मर्यम के पुत्र (ईसा) को बढ़ा चढ़ा दिया। वास्तव में मैं उस का दास हूँ। अतः मुझे अल्लाह का दास और उस का रसूल कहो। (देखिये सह़ीह़ बुख़ारीः 3445)
26:187जुज़ 19 · पृ. 375

فَأَسْقِطْ عَلَيْنَا كِسَفًا مِنَ السَّمَاءِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ187

तो हमपर गिरा दे कोई खण्ड आकाश का, यदि तू सच्चा है।
26:188जुज़ 19 · पृ. 375

قَالَ رَبِّي أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ188

उसने कहाः मेरा पालनहार भली प्रकार जानता है उसे, जो कुछ तुम कर रहे हो।
26:189जुज़ 19 · पृ. 375

فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمْ عَذَابُ يَوْمِ الظُّلَّةِ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ189

तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अन्ततः, पकड़ लिया उन्हें छाया के[1] दिन की यातना ने। वस्तुतः, वह एक भीषण दिन की यातना थी।
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1. अर्थात उन की यातना के दिन उन पर बादल छा गया। फिर आग बरसने लगी और धरती कंपित हो गई। फिर एक कड़ी ध्वनि ने उन की जानें ले लीं। (इब्ने कसीर)
26:190जुज़ 19 · पृ. 375

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ190

निश्चय ही, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और नहीं थे उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले।
26:191जुज़ 19 · पृ. 375

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ191

और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।
26:192जुज़ 19 · पृ. 375

وَإِنَّهُ لَتَنْزِيلُ رَبِّ الْعَالَمِينَ192

तथा निःसंदेह, ये (क़ुर्आन) पूरे विश्व के पालनहार का उतारा हुआ है।
26:193जुज़ 19 · पृ. 375

نَزَلَ بِهِ الرُّوحُ الْأَمِينُ193

इसे लेकर रूह़ुल अमीन[1] उतरा।
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1. रूह़ुल अमीन से अभिप्राय आदरणीय फ़रिश्ता जिब्रील (अलैहिस्सलाम) हैं। जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अल्लाह की ओर से वह़्यी ले कर उतरते थे जिस के कारण आप रसूलों की और उन की जातियों की दशा से अवगत हुये। अतः यह आप के सत्य रसूल होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
26:194जुज़ 19 · पृ. 375

عَلَىٰ قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ الْمُنْذِرِينَ194

आपके दिल पर, ताकि आप हो जायें सावधान करने वालों में।
26:195जुज़ 19 · पृ. 375

بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ مُبِينٍ195

खुली अरबी भाषा में।
26:196जुज़ 19 · पृ. 375

وَإِنَّهُ لَفِي زُبُرِ الْأَوَّلِينَ196

तथा इसकी चर्चा[1] अगले रसूलों की पुस्तकों में (भी) है।
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1. अर्थात सभी आकाशीय ग्रन्थों में अन्तिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन तथा आप पर पुस्तक क़ुर्आन के अवतरित होने की भविष्वाणी की गई है। और सब नबियों ने इस की शुभ सूचना दी है।
26:197जुज़ 19 · पृ. 375

أَوَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ آيَةً أَنْ يَعْلَمَهُ عُلَمَاءُ بَنِي إِسْرَائِيلَ197

क्या और उनके लिए ये निशानी नहीं है कि इस्राईलियों के विद्वान[1] इसे जानते हैं।
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1. बनी इस्राईल के विद्वान अब्दुल्लाह बिन सलाम आदि जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और क़ुर्आन पर ईमान लाये वह इस के सत्य होने का खुला प्रमाण हैं।
26:198जुज़ 19 · पृ. 375

وَلَوْ نَزَّلْنَاهُ عَلَىٰ بَعْضِ الْأَعْجَمِينَ198

और यदि हम इसे उतार देते किसी अजमी[1] पर।
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1. अर्थात ऐसे व्यक्ति पर जो अरब देश और जाति के अतिरिक्त किसी अन्य जाति का हो।
26:199जुज़ 19 · पृ. 375

فَقَرَأَهُ عَلَيْهِمْ مَا كَانُوا بِهِ مُؤْمِنِينَ199

और वह, इसे उनके समक्ष पढ़ता, तो वे उसपर ईमान लाने वाले न होते[1]।
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1. अर्थात अर्बी भाषा में न होता तो कहते कि यह हमारी समझ में नहीं आता। (देखियेः सूरह ह़ा, मीम, सज्दा, आयतः44)
26:200जुज़ 19 · पृ. 375

كَذَٰلِكَ سَلَكْنَاهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ200

इसी प्रकार, हमने घुसा दिया है इस (क़ुर्आन के इन्कार) को पापियों के दिलों में।
26:201जुज़ 19 · पृ. 375

لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ201

वे नहीं ईमान लायेंगे उसपर, जब तक देख नहीं लेंगे दुःखदायी यातना।
26:202जुज़ 19 · पृ. 375

فَيَأْتِيَهُمْ بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ202

फिर, वह उनपर सहसा आ जायेगी और वे समझ भी नहीं पायेंगे।
26:203जुज़ 19 · पृ. 375

فَيَقُولُوا هَلْ نَحْنُ مُنْظَرُونَ203

तो कहेंगेः क्या हमें अवसर दिया जायेगा?
26:204जुज़ 19 · पृ. 375

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ204

तो क्या वे हमारी यातना की जल्दी मचा रहे हैं?
26:205जुज़ 19 · पृ. 375

أَفَرَأَيْتَ إِنْ مَتَّعْنَاهُمْ سِنِينَ205

(हे नबी!) तो क्या आपने विचार किया कि यदि हम लाभ पहुँचायें इन्हें वर्षों।
26:206जुज़ 19 · पृ. 375

ثُمَّ جَاءَهُمْ مَا كَانُوا يُوعَدُونَ206

फिर आ जाये उनपर वह, जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही थी।
26:207जुज़ 19 · पृ. 376

مَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يُمَتَّعُونَ207

तो कुछ काम नहीं आयेगा उनके, जो उन्हें लाभ पहुँचाया जाता रहा?
26:208जुज़ 19 · पृ. 376

وَمَا أَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنْذِرُونَ208

और हमने किसी बस्ती का विनाश नहीं किया, परन्तु उसके लिए सावधान करने वाले थे।
26:209जुज़ 19 · पृ. 376

ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ209

शिक्षा देने के लिए और हम अत्याचारी नहीं हैं।
26:210जुज़ 19 · पृ. 376

وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ210

तथा नहीं उतरे हैं (इस क़ुर्आन) को लेकर शैतान।
26:211जुज़ 19 · पृ. 376

وَمَا يَنْبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ211

और न योग्य है उनके लिए और न वे इसकी शक्ति रखते हैं।
26:212जुज़ 19 · पृ. 376

إِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ212

वास्तव में, वे तो (इसके) सुनने से भी दूर[1] कर दिये गये हैं।
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1. अर्थात इस के अवतरित होने के समय शैतान आकाश की ओर जाते हैं तो उल्का उन्हें भष्म कर देते हैं।
26:213जुज़ 19 · पृ. 376

فَلَا تَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ فَتَكُونَ مِنَ الْمُعَذَّبِينَ213

अतः, आप न पुकारें अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को, अन्यथा आप दण्डितों में हो जायेंगे।
26:214जुज़ 19 · पृ. 376

وَأَنْذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ214

और आप सावधान कर दें अपने समीपवर्ती[1] संबंधियों को।
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1. आदरणीय इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि जब यह आयत उतरी तो आप सफ़ा पर्वत पर चढ़े। और क़ुरैश के परिवारों को पुकरा। और जब सब एकत्र हो गये, और जो स्वयं नहीं आ सका तो उस ने किसी प्रतिनिधि को भेज दिया। और अबू लहब तथा क़ुरैश आ गये तो आप ने फ़रमायाः यदि मैं तुम से कहूँ कि उस वादी में एक सेना है जो तुम पर आक्रमण करने वाली है, तो क्या तुम मुझे सच्चा मानोगे? सब ने कहाः हाँ। हम ने आप को सदा ही सच्चा पाया है। आप ने कहाः मैं तुम्हें आगामी कड़ी यातना से सावधान कर रहा हूँ। इस पर अबू लहब ने कहाः तेरा पूरे दिन नाश हो! क्या हमें इसी के लिये एकत्र किया है? और इसी पर सूरह लह्ब उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4770)
26:215जुज़ 19 · पृ. 376

وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ215

और झुका दें अपना बाहु[1] उसके लिए, जो आपका अनुयायी हो, ईमान वालों में से।
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1. अर्थात उस के साथ विनम्रता का व्यवहार करें।
26:216जुज़ 19 · पृ. 376

فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّي بَرِيءٌ مِمَّا تَعْمَلُونَ216

और यदि वे आपकी अवज्ञा करें, तो आप कह दें कि मैं निर्दोष हूँ उससे, जो तुम कर रहे हो।
26:217जुज़ 19 · पृ. 376

وَتَوَكَّلْ عَلَى الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ217

तथा आप भरोसा करें अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् पर।
26:218जुज़ 19 · पृ. 376

الَّذِي يَرَاكَ حِينَ تَقُومُ218

जो देखता है आपको, जिस समय (नमाज़) में खड़े होते हैं।
26:219जुज़ 19 · पृ. 376

وَتَقَلُّبَكَ فِي السَّاجِدِينَ219

और आपके फिरने को सज्दा करने[1] वालों में।
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1. अर्थात प्रत्येक समय अकेले हों या लोगों के बीच हों।
26:220जुज़ 19 · पृ. 376

إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ220

निःसंदेह, वही सब कुछ सुनने-जानने वाला है।
26:221जुज़ 19 · पृ. 376

هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَنْ تَنَزَّلُ الشَّيَاطِينُ221

क्या मैं तुम सबको बताऊँ कि किसपर शैतान उतरते हैं?
26:222जुज़ 19 · पृ. 376

تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ222

वे उतरते हैं, प्रत्येक झूठे पापी[1] पर।
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1. ह़दीस में है कि फ़रिश्ते बादल में उतरते हैं, और आकाश के निर्णय की बात करते हैं, जिसे शैतान चोरी से सुन लेते हैं। और ज्योतिषियों को पहुँचा देते हैं। फिर वह उस में सौ झूठ मिलाते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारीः3210)
26:223जुज़ 19 · पृ. 376

يُلْقُونَ السَّمْعَ وَأَكْثَرُهُمْ كَاذِبُونَ223

वे पहुँचा देते हैं, सुनी सुनाई बातों को और उनमें अधिक्तर झूठे हैं।
26:224जुज़ 19 · पृ. 376

وَالشُّعَرَاءُ يَتَّبِعُهُمُ الْغَاوُونَ224

और कवियों का अनुसरण बहके हुए लोग करते हैं।
26:225जुज़ 19 · पृ. 376

أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِي كُلِّ وَادٍ يَهِيمُونَ225

क्या आप नहीं देखते कि वे प्रत्येक वादी में फिरते[1] हैं।
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1. अर्थात कल्पना की उड़ान में रहते हैं।
26:226जुज़ 19 · पृ. 376

وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ226

और ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।
26:227जुज़ 19 · पृ. 376

إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَذَكَرُوا اللَّهَ كَثِيرًا وَانْتَصَرُوا مِنْ بَعْدِ مَا ظُلِمُوا ۗ وَسَيَعْلَمُ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَيَّ مُنْقَلَبٍ يَنْقَلِبُونَ227

परन्तु वो (कवि), जो[1] ईमान लाये, सदाचार किये, अल्लाह का बहुत स्मरण किया तथा बदला लिया इसके पश्चात् कि उनके ऊपर अत्याचार किया गया! तथा शीघ्र ही जान लेंगे, जिन्होंने अत्याचार किया है कि व किस दुष्परिणाम की ओर फिरते हैं!
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1. इन से अभिप्रेत ह़स्सान बिन साबित आदि कवि हैं जो क़ुरैश के कवियों की भर्त्सना किया करते थे। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4124)

सूरह के आरंभ से चलाएँ