Al-Jumu'ah

سورة الجمعة

सूरह 62 · मदनी · 11 आयतें

62:1जुज़ 28 · पृ. 553

يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ الْمَلِكِ الْقُدُّوسِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ1

अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करती हैं, वह सब चीज़ें, जो आकाशों तथा धरती में हैं। जो अधिपति, अति पवित्र, प्रभावशाली, गुणी (दक्ष) है।
62:2जुज़ 28 · पृ. 553

هُوَ الَّذِي بَعَثَ فِي الْأُمِّيِّينَ رَسُولًا مِنْهُمْ يَتْلُو عَلَيْهِمْ آيَاتِهِ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَإِنْ كَانُوا مِنْ قَبْلُ لَفِي ضَلَالٍ مُبِينٍ2

वही है, जिसने निरक्षरों[1] में एक रसूल भेजा उन्हीं में से। जो पढ़कर सुनाते हैं उन्हें अल्लाह की आयतें और पवित्र करते हैं उन्हें तथा शिक्षा देते हैं उन्हें पुस्तक (क़ुर्आन) तथा तत्वदर्शिता (सुन्नत)[2] की। यद्यपि वे इससे पूर्व खुले कुपथ में थे।
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1. अनभिज्ञों से अभिप्राय, अरब हैं। अर्थात जो अह्ले किताब नहीं हैं। भावार्थ यह है कि पहले रसूल इस्राईल की संतति में आते रहे। और अब अन्तिम रसूल इस्माईल की संतति में आया है। जो अल्लाह की पुस्तक क़ुर्आन पढ़ कर सुनाते हैं। यह केवल अरबों के नबी नहीं पूरे मनुष्य जाति के नबी हैं। 2. सुन्नत जिस के लिये ह़िक्मत शब्द आया है उस से अभिप्राय साधारण परिभाषा में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ह़दीस, अर्थात आप का कथन और कर्म इत्यादि है।
62:3जुज़ 28 · पृ. 553

وَآخَرِينَ مِنْهُمْ لَمَّا يَلْحَقُوا بِهِمْ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ3

तथा दूसरों के लिए भी उनमें से, जो उनसे अभी नहीं[1] मिले हैं। वह अल्लाह प्रभुत्वशाली, गुणी है।
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1. अर्थात आप अरब के सिवा प्रलय तक के लिये पूरे मानव संसार के लिये भी रसूल बना कर भेजे गये हैं। ह़दीस में है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से प्रश्न किया गया कि वह कौन हैं? तो आप ने अपना हाथ सलमान फ़ारसी के ऊपर रख दिया। और कहाः यदि ईमान सुरैया (आकाश के कुछ तारों का नाम) के पास भी हो तो कुछ लोग उस को वहाँ से भी प्राप्त कर लेंगे। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4897)
62:4जुज़ 28 · पृ. 553

ذَٰلِكَ فَضْلُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَنْ يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ4

ये[1] अल्लाह का अनुग्रह है, जिसे वह प्रदान करता है उसे, जिसे वह चाहता है और अल्लाह बड़े अनुग्रह वाला है।
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1. अर्थात आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अरबों तथा पूरे मानव संसार के लिये रसूल बनाना।
62:5जुज़ 28 · पृ. 553

مَثَلُ الَّذِينَ حُمِّلُوا التَّوْرَاةَ ثُمَّ لَمْ يَحْمِلُوهَا كَمَثَلِ الْحِمَارِ يَحْمِلُ أَسْفَارًا ۚ بِئْسَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ5

उनकी दशा जिनपर तौरात का भार रखा गया, फिर तदानुसार कर्म नहीं किया, उस गधे के समान है, जिसके ऊपर पुस्तकें[1] लदी हुई हों। बुरा है उस जाति का उदाहरण, जिन्होंने झुठला दिया अल्लाह की आयतों को और अल्लाह मार्गदर्शन नहीं देता अत्याचारियों को।
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1. अर्थात जैसे गधे को अपने ऊपर लादी हुई पुस्तकों का ज्ञान नहीं होता कि उन में क्या लिखा है वैसे ही यह यहूदी तोरात के अनुसार कर्म न कर के गधे के समान हो गये हैं।
62:6जुज़ 28 · पृ. 553

قُلْ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ هَادُوا إِنْ زَعَمْتُمْ أَنَّكُمْ أَوْلِيَاءُ لِلَّهِ مِنْ دُونِ النَّاسِ فَتَمَنَّوُا الْمَوْتَ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ6

आप कह दें कि हे यहूदियो! यदि तुम समझते हो कि तुम ही अल्लाह के मित्र हो अन्य लोगों के अतिरिक्त, तो कामना करो मरण की यदि तुन सच्चे[1] हो?
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1. यहूदियों का दावा था कि वही अल्लाह के प्रियवर हैं। (देखियेः सूरह बक़रह, आयतः 111, तथा सूरह माइदा, आयतः 18) इस लिये कहा जा रहा है स्वर्ग में पहुँचने कि लिये मौत की कामना करो।
62:7जुज़ 28 · पृ. 553

وَلَا يَتَمَنَّوْنَهُ أَبَدًا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ7

तथा वे अपने किये हुए करतूतों के कारण, कदापि उसकी कामना नहीं करेंगे और अल्लाह भली-भाँति अवगत है अत्याचारियों से।
62:8जुज़ 28 · पृ. 553

قُلْ إِنَّ الْمَوْتَ الَّذِي تَفِرُّونَ مِنْهُ فَإِنَّهُ مُلَاقِيكُمْ ۖ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُمْ بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ8

आप कह दें कि जिस मौत से तुम भाग रहे हो, वह अवश्य तुमसे मिलकर रहेगी। फिर तुम अवश्य फेर दिये जाओगे परोक्ष (छुपे) तथा प्रत्यक्ष (खुले) के ज्ञानी की ओर। फिर वह तुम्हें सूचित कर देगा उससे, जो तुम करते हो।[1]
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1. अर्थात तुम्हारे दुष्कर्मों के परिणाम से।
62:9 · When the Friday prayer is calledजुज़ 28 · पृ. 554

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نُودِيَ لِلصَّلَاةِ مِنْ يَوْمِ الْجُمُعَةِ فَاسْعَوْا إِلَىٰ ذِكْرِ اللَّهِ وَذَرُوا الْبَيْعَ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ إِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَ9

हे ईमान वालो! जब अज़ान दी जाये नमाज़ के लिए जुमुआ के दिन, तो दौड़[1] जाओ अल्लाह की याद की ओर तथा त्याग दो क्रय-विक्रय।[2] ये उत्तम है तुम्हारे लिए, यदि तुम जानो।
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1. अर्थ यह है जुमुआ की अज़ान हो जाये तो अपने सारे कारोबार बंद कर के जुमुआ का ख़ुत्बा सुनने, और जुमुआ की नमाज़ पढ़ने के लिये चल पड़ो। 2. इस से अभिप्राय संसारिक कारोबार है।
62:10जुज़ 28 · पृ. 554

فَإِذَا قُضِيَتِ الصَّلَاةُ فَانْتَشِرُوا فِي الْأَرْضِ وَابْتَغُوا مِنْ فَضْلِ اللَّهِ وَاذْكُرُوا اللَّهَ كَثِيرًا لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ10

फिर जब नमाज़ हो जाये, तो फैल जाओ धरती में तथा खोज करो अल्लाह के अनुग्रह की तथा वर्णन करते रहो अल्लाह का अत्यधिक, ताकि तुम सफल हो जाओ।
62:11जुज़ 28 · पृ. 554

وَإِذَا رَأَوْا تِجَارَةً أَوْ لَهْوًا انْفَضُّوا إِلَيْهَا وَتَرَكُوكَ قَائِمًا ۚ قُلْ مَا عِنْدَ اللَّهِ خَيْرٌ مِنَ اللَّهْوِ وَمِنَ التِّجَارَةِ ۚ وَاللَّهُ خَيْرُ الرَّازِقِينَ11

और जब वे देख लेते हैं कोई व्यापार अथवा खेल, तो उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं।[1] तथा आपको छोड़ देते हैं खड़े। आप कह दें कि जो कुछ अल्लाह के पास है, वह उत्तम है खेल तथा व्यापार से और अल्लाह सर्वोत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।
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1. ह़दीस में है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमुआ का ख़ुत्बा (भाषण) दे रहे थे कि एक कारवाँ ग़ल्ला ले कर आ गया। और सब लोग उस की ओर दौड़ पड़े। बारह व्यक्ति ही आप के साथ रह गये। उसी पर अल्लाह ने यह आयत उतारी। (सह़ीह़ बुख़ारीः 4899)

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