Al-Humazah

سورة الهمزة

सूरह 104 · मक्की · 9 आयतें

104:1जुज़ 30 · पृ. 601

وَيْلٌ لِكُلِّ هُمَزَةٍ لُمَزَةٍ1

विनाश हो उस व्यक्ति का, जो कचोके लगाता रहता है और चौटे करता रहता है।
104:2जुज़ 30 · पृ. 601

الَّذِي جَمَعَ مَالًا وَعَدَّدَهُ2

जिसने धन एकत्र किया और उसे गिन-गिन कर रखा।
104:3जुज़ 30 · पृ. 601

يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُ أَخْلَدَهُ3

क्या वह समझता है कि उसका धन उसे संसार में सदा रखेगा?[1]
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1. (1-3) इन आयतों में धन के पुजारियों के अपने धन के घमंड में दूसरों का अपमान करने और उन की कृपणता (कंजूसी) का चित्रण किया गया है, उन्हें चेतावनी दी गई है कि यह आचरण विनाशकारी है, धन किसी को संसार में सदा जीवित नहीं रखेगा, एक समय आयेगा कि उसे सब कुछ छोड़ कर ख़ाली हाथ जाना पड़ेगा।
104:4जुज़ 30 · पृ. 601

كَلَّا ۖ لَيُنْبَذَنَّ فِي الْحُطَمَةِ4

कदापि ऐसा नहीं होगा। वह अवश्य ही 'ह़ुतमा' में फेंका जायेगा।
104:5जुज़ 30 · पृ. 601

وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْحُطَمَةُ5

और तुम क्या जानो कि 'ह़ुतमा' क्या है?
104:6जुज़ 30 · पृ. 601

نَارُ اللَّهِ الْمُوقَدَةُ6

वह अल्लाह की भड़काई हुई अग्नि है।
104:7जुज़ 30 · पृ. 601

الَّتِي تَطَّلِعُ عَلَى الْأَفْئِدَةِ7

जो दिलों तक जा पहूँचेगी।
104:8जुज़ 30 · पृ. 601

إِنَّهَا عَلَيْهِمْ مُؤْصَدَةٌ8

वह, उसमें बन्द कर दिये जायेंगे।
104:9जुज़ 30 · पृ. 601

فِي عَمَدٍ مُمَدَّدَةٍ9

लँबे-लँबे स्तंभों में।[1]
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1. (4-9) इन आयतों के अन्दर परलोक में धन के पुजारियों के दुष्परिणाम से अवगत कराया गया है कि उन को अपमान के साथ नरक में फेंक दिया जायेगा। जो उन्हें खण्ड कर देगी और दिलों तक जो कुविचारों का केंद्र हैं पहुँच जायेगी, और उस में इन अपराधियों को फेंक कर ऊपर से बन्द कर दिया जायेगा।

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