الهندية

سورة غافر · 40:55

فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنْبِكَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ

तो (हे नबी!) आप धैर्य रखें। वास्तव में, अल्लाह का वचन[1] सत्य है तथा क्षमा माँगें अपने पाप[2] की तथा पवित्रता का वर्णन करते रहें अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ, संध्या और प्रातः।
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1. नबियों की सहायता करने का। 2. अर्थात भूल-चूक की। आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मैं दिन में 70 बार क्षमा माँगता हूँ। और 70 बार से अधिक तौबा करता हूँ। (सह़ीह़ बुफ़ारीः 6307) जब कि अल्लाह ने आप को निर्दोष (मासूम) बनाया है।
الهندية - سورة غافر 40:55 · Tlawati