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Ali 'Imran · 3:172

الَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِلَّهِ وَالرَّسُولِ مِنْ بَعْدِ مَا أَصَابَهُمُ الْقَرْحُ ۚ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا مِنْهُمْ وَاتَّقَوْا أَجْرٌ عَظِيمٌ

जिन्होंने अल्लाह और रसूल की पुकार स्वीकार[1] की, इसके पश्चात् कि उन्हें आघात पहुँचा, उनमें से उनके लिए जिन्होंने सुकर्म किया तथा (अल्लाह से) डरे, महा प्रतिफल है।
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1. जब काफ़िर उह़ुद से मक्का वापिस हुये तो मदीने से 30 मील दूर "रौह़ाअ" से फिर मदीना वापिस आने का निश्चय किया। जब आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को सूचना मिली, तो सेना ले कर "ह़मराउल असद" तक पहुँचे जिसे सुन कर वह भाग गये। इधर मुसलमान सफल वापिस आये। इस आयत में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों की सराहना की गई है जिन्हों ने उह़ुद में घाव खाने के पश्चात भी नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का साथ दिया। यह आयतें ईसी से संबंधित हैं।

ތިޔަ ބަހުން ތަފްސީރު

ޢަރަބި ތަފްސީރު

ތަރުޖަމާ

އަޑުއަހާ